योगी सरकार 10 साल पहले केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेगी 

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प्रयागराज के सरकारी परामर्शदाता गुलाब चंद्र अग्रहरि ने कहा, ”हमें प्रयागराज डीएम की तरफ से न्‍यायालय में लंबित दो मामलों को वापस लेने के सरकारी निर्देश मिले हैं। संबंधित सरकारी वकील को वापसी की अर्जी लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्‍तर प्रदेश सरकार ने उप-मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ 10 साल पहले कौशांबी में दर्ज दो आपराधिक मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है। राज्‍य के अवर सचिव अरुण कुमार राय की तरफ से कौशांबी जिलाधिकारी को 15 नवंबर को इस संबंध में पत्र लिखा गया। डीएम से कहा गया कि वह संबंधित न्‍यायालय में मामले वापस लेने की अर्जी दाखिल करें।
कौशांबी पुलिस के अनुसार, पहला मामला 22 सितंबर 2008 को दर्ज किया गया। जब मोहब्‍बतपुर पैसना थानाध्‍यक्ष, चंद्रशेखर प्रसाद ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153-ए और 295-ए के तहत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, जांच के दौरान मौर्य का नाम सामने आया मगर जांच अधिकारी ने आरोपियों द्वारा किए गए अपराधों को 153-ए और 295-ए के तहत नहीं पाया और दोनों धाराएं हटा ली गईं।
दूसरा मामला भी उसी दिन एसएचओ प्रसाद की ओर से मोहब्‍बतपुर पैसना थाने में मौर्य समेत 10 लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया। आरोपों में फर्जी ‘र्मा दुर्गा समिति मोहब्‍बतपुर’ के नाम से लेटर पैड बनवा कर रुपये इकट्ठा करने के आरोप हैं।
अदालत ने सितंबर वर्ष 2008 के मामले में उप-मुख्यमंत्री के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे, जहां से उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी कि दुर्गा पूजा समिति के फर्जी कागजात तैयार करने के बाद जनता से धन इकट्ठा किया।
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केशव व उनके वकील इस आरोप को गलत बता चुके हैं। इन मामलों पर 16 नवंबर को मौर्य प्रयागराज कचहरी पहुंचे। विशेष न्यायाधीश के सामने अपने समर्पण की अर्जी दी, इसके बाद उन्हें जमानत दे दी गई।

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