कानपुर में हिस्ट्रीशीटर पिंटू सेंगर हत्याकांड की गुत्थी उलझ गई है। प्रॉपर्टी विवाद और राजनीतिक रंजिश के अलावा पुरानी रंजिश के बिंदुओं पर भी पुलिस जांच कर रही है मगर पांच दिन बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। हत्या की साजिश रचने से लेकर शूटरों तक के बारे में भी पुलिस खास जानकारी नहीं जुटा सकी है।
बस नामजद आरोपियों से पूछताछ जारी है। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। बीते शनिवार को पिंटू सेंगर की हत्या की गई थी। उसके भाई धर्मेंद्र ने प्रॉपर्टी डीलर मनोज गुप्ता, पप्पू स्मार्ट, सउद अख्तर, अधिवक्ता दीनू उपाध्याय व अरिदमन सिंह समेत अन्य अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस पिंटू से पप्पू स्मार्ट व सउद के प्रॉपर्टी विवाद के पहलू को खंगाल रही है।
साथ मनोज केसाथ भी प्रॉपर्टी की रंजिश के मामले की तह तक जा रही है। यही नहीं पुलिस इन तीनों को एक साथ जोड़कर पिंटू की हत्या की साजिश रचने की कहानी को भी स्थापित करने का प्रयास कर रही लेकिन कोई खास साक्ष्य सुबूत नहीं जुटा सकी है। दो की रंजिश में किसी तीसरे ने तो हाथ साफ नहीं किया, इस बिंदु को भी देख रही है।
जांच के तमाम बिंदु, इसलिए उलझ गई पुलिस
पप्पू सउद और मनोज केअलावा एक टेनरी मालिक व जाजमऊ के बड़े कारोबारियों से भी पिंटू का पहले विवाद रहा है। बंसल कूलरवाले की हत्या समेत अन्य वो मामले जिनमें पिंटू आरोपी रहा है, उनको भी पुलिस खंगाल रही है। इन तमाम पहलुओं के चलते पुलिस उलझ गई है। किसी भी बिंदु पर ठोस सुबूत नहीं मिल रहे हैं। पुलिस अफसरों का कहना है कि शूटरों के गिरफ्त में आने के बाद हत्याकांड का पर्दाफाश हो जाएगा।
किसी तीसरे पर शक गहराया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में पिंटू की मनोज, पप्पू और सउद से दुश्मनी चल रही थी। पुराने व अन्य उनके दुश्मनों को भी इसकी जानकारी थी। पुलिस का कहना है कि वो लोग वर्तमान स्थिति का फायदा उठा कर हत्याकांड को अंजाम दिला सकते हैं। जिससे पूरा शक इन सभी पर जाए। हालांकि इस कहानी में कितना सच है और कितना झूठ ये खुलासे केबाद ही स्पष्ट हो सकेगा

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