गुजरात सरकार के खिलाफ मुस्लिमों ने दिया धरना, की अलग मंत्रालय बनाने की मांग

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गुजरात के गांधीनगर स्थित सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में भीड़ को संबोधित करते हुए एमसीसी के कोऑर्डिनेटर मुजाहिद नसीफ ने कहा कि समिति शीतकालीन सत्र के दौरान या बजट सत्र के दौरान सरकार का ध्यान राज्य के मुसलमानों की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सदन का घेराव करेगी।
उन्होनें आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें फोन कर सदन का घेराव नहीं करने और अपने पोस्टर से ‘सदन का घेराव’ हटाने को कहा। उन्होंने आगे कहा, “इससे यह साबित होता है कि प्रशासन और सत्तारूढ़ पार्टी के बीच भय का महौल है। लेकिन हमने ‘सदन का घेराव’ शब्द को अपने बैनर में रखा ताकि प्रशासन और राजनेताओं को यह याद रहे कि वे मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार को अनदेखा नहीं कर सकते हैं।”
सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में मंगलवार (18 दिसंबर) को राज्य के मुसलमानों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के मौके पर हुआ।
इसका आयोजन गुजरात के अल्पसंख्यक समन्वय समिति (एमसीसी) द्वारा किया गया था। पहले एमसीसी ने राज्य विधानसभा को घेरने की तैयारी की थी, लेकिन गांधीनगर पुलिस और प्रशासन द्वारा इजाजत नहीं मिलने पर सत्याग्रह छावनी ग्राउंड में प्रदर्शन का फैसला किया गया।
नफीस ने आरोप लगाया, “यह अफवाह उड़ाया गया था कि जो लोग मंगलवार को आयोजित प्रदर्शन में शामिल होंगे, उनके ऊपर लाठीचार्ज और फायरिंग की जाएगी। अफवाहों को दरकिनार कर जनता प्रदर्शन के लिए इकट्ठे हुए और साबित किया कि
वे अपने अधिकारों की मांग करने के लिए किसी से डरने वाले नहीं हैं।” नफीस ने यह भी घोषणा किया कि अगले साल से मुसलमानों के अधिकार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सभी जिलों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
नफीस ने कहा कि गुजरात एकमात्र वैसा राज्य है, जहां राज्य अल्पसंख्यक मंत्रालय और अल्पसंख्यक आयोग नहीं है। उन्होंने कहा, “यहां अल्पसंख्यकों के विकास के लिए बजट में राशि आवंटित नहीं की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम लागू नहीं होते हैं।
क्या यह असंवैधानिक नहीं है?” सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह मुसलमानों के लिए खोखला साबित हो रहा है। गुजरात में मुस्लिम लड़कियों की कक्षा 1 से कक्षा 5 तक स्कूल छोड़ने की दर 10.58 प्रतिशत थी, लेकिन सरकार द्वारा कुछ नहीं किया गया।
भाजपा सरकार द्वारा 2002 के बाद गुजरात को दंगा मुक्त राज्य के दावे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “पहले बड़े पैमाने पर दंगे होते थे, लेकिन अभी भी छोटे स्तर पर दंगे होते हैं। इन दंगों पर मीडथ्या का ध्यान नहीं जाता है।”
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नफीस ने मुस्लिम क्षेत्र में सरकारी विद्यालय स्थापित करने, मुस्लिम क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार के बजट में 1000 करोड़ का आवंटन करने, मुसलमानों की हालत को सुधारने के लिए प्रधानमंत्री के 15 बिंदुओं वाले कार्यक्रम को लागू करने, मदसरा की डिग्री को 10वीं कक्षा के बराबर मान्यता देने, अल्पसंख्यक मंत्रालय और राज्य अल्पसंख्यक आयोग का गठन करने की मांग की।

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