फर्जीवाड़े का खुलासा, 400 रुपए में ट्रेन में खुलेआम कंबल बेच रहे हैं अटेंडेंट

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मुजफ्फरपुर। रेलवे के अनुसार पिछले वर्ष 14 करोड़ के कंबल, चादर, तकिया और तौलिया आदि सामान यात्री अपने साथ ले गए हैं। मगर हकीकत यह है कि एसी कोच के अटेंडेंट ही ये सामान चुराकर बेच रहे हैं और नाम यात्रियों का लगा देते हैं।
9 से 12 दिसंबर तक चली भास्कर की इन्वेस्टीगेशन में सरयू-यमुना, टाटा-छपरा और रांची-जयनगर एक्सप्रेस के अटेंडेंट मात्र चार-चार सौ रुपए में कंबल बेचते हुए एक्सपोज हुए हैं। 9 दिसंबर को समस्तीपुर स्टेशन पर सरयू-यमुना एक्सप्रेस में एसी-टू कोच के अटेंडेंट ने तो
बिना पूर्व डील के ही 800 रुपए में दो कंबल बेचे। वहीं 11 दिसंबर को टाटा-छपरा के अटेंडेंट मुजफ्फरपुर से आगे चलते हुए भगवानपुर स्टेशन पर 1000 रुपए में तीन कंबल रिपोर्टर को बेचे। वह भी पिछले दरवाजे से।

रांची-जयनगर एक्सप्रेस के अटेंडेंट ने तो 2400 रुपए में 6 कंबल की डील की, जिसके लिए उसने टीम को 12 दिसंबर को जयनगर स्टेशन बुलाया था।
वहां पहुंचने पर अटेंडेंट ने स्टेशन के बाहर एक होटल में करीब एक घंटा रिपोर्टर से डील की। फिर सौदा पटने पर सफेद और नीले रंग दो बोरों में 6 कंबल भरकर रिपोर्टर के हवाले कर दिए।
ये कंबल रांची-जयनगर एक्सप्रेस के अटेंडेंट ने बेचा है।  इस पर दक्षिण पूर्व रेलवे का टैग लगा हुआ है। भास्कर इसे अब भी रेलवे की ही संपत्ति मानता है।
चूंकि अटेंडेंटों की इस चोरी को सबूत सहित हमें सबके सामने लाना था, इसलिए रिपोर्टरों ने कंबल खरीदे। रेलवे जब चाहे तब ये सारे कंबल उसे सौंप दिए जाएंगे।

मुजफ्फरपुर में सौदा तय, गोरौल में डिलेवरी : 11 दिसंबर, 1:00 बजे मुुजफ्फरपुर स्टेशन, टाटा-छपरा एक्सप्रेस की (एसी-थ्री) बोगी
टाटा से चल कर छपरा तक जाने वाली ट्रेन नंबर 18181 प्लेेटफॉर्म नंबर तीन पर आकर खड़ी होती है। भास्कर टीम कोच नंबर बी-1 में चढ़ती है। सामने लेटा हुआ था।
रिपोर्टर : अटेंडेंट से बोला कि क्या कंबल मिलेगा?
अटेंडेंट : कितने चाहिए?
रिपोर्टर : पांच कंबल चाहिए?
अटेंडेंट : दो हो पाएगा और 1000 रुपए लगेगा।
रिपोर्टर : (800 रुपए और झोला पकड़ाते हुए) दो कंबल ही दे दो और पैसे इतने ही हैं।
अटेंडेंट : अगले स्टेशन पर दे दूंगा।
ट्रेन गोरौल स्टेशन पर रुकती है। रिपोर्टर जनरल बोगी से निकलकर बी-1 कोच में जाता है। वहां से अटेंडेंट पटरी के रास्ते बुलाता है और झोला पकड़ा देता है।
9 दिसंबर, 2:30 बजे समस्तीपुर स्टेशन – सरयू-यमुना एक्सप्रेस की (एसी-टू) बोगी
समस्तीपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर जयनगर से अमृतसर तक जाने वाली ट्रेन नंबर-14649 सरयू-यमुना एक्सप्रेस आकर खड़ी होती है। भास्कर टीम एबी-1 में चढ़ती है और अटेंडेंट से बातचीत शुरू करती है :-
रिपोर्टर : वीरजी कंबल चाहिए?
टेंडेंट: किस कोच में रिजर्वेंशन है?
 रिपोर्टर : मेरा रिजर्वेशन नहीं है।
अटेंडेंट: कितने कंबल चाहिए?
रिपोर्टर : पांच कंबल चाहिए थे।
अटेंडेंट : पांच नहीं, दो हो पाएगा।
रिपोर्टर : ठीक है वीरजी, दो ही दे दो। रुपए कितने लगेंगे?
अटेंडेंट : हर कंंबल पर 500-500 रुपए देने पड़ेंगे।
रिपोर्टर : (झोला व 1000 रु.पकड़ाते हुए) इतने में तीन कंबल दे दो।
अटेंडेंट : (जनरल से एसी कोच के बीच लगे शटर की ओर दिखाते हुए) उधर से आओ।
रिपोर्टर : जनरल कोच से शटर के पास पहुंचता है, जहां दो कंबल से भरा झोला अटेंडेंट पकड़ा देता है।
12 दिसंबर, 8:30 बजे जयनगर स्टेशन – रांची-जयनगर एक्सप्रेस की (एसी-टू) बोगी
रांची-जयनगर कोच बी-1 के अटेंडर से 10 दिसंबर को ही 6 कंबल का सौदा तय होता है। अटेंडर 12 दिसंबर की सुबह ट्रेन के जयनगर पहुंचने पर डिलेवरी को तैयार होता है।
अटेंडेंट : (सुबह 7.30 बजे फोन करता है) ट्रेन जयनगर स्टेशन पहुंचने वाली है, आ जाइए?
रिपोर्टर :  के पहुंचते ही वहां खड़े दो अटेंडेंट उसे जयनगर स्टेशन के बाहर वैष्णव होटल लेकर जाता है।
अटेंडेंट : इतना देर कर दिए, लाइए पैसा दीजिए।रिपोर्टर: (2400 रुपए और दो झोले पकड़ाते हुए) कहां आना होगा?
अटेंडेंट : थोड़ी देर में कॉल करता हूं। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ट्रेन खड़ी है। वहां आ जाइएगा।
थोड़ी देर के बाद कॉल आ जाता है। रिपोर्टर एसी कोच के बाहर बैठा इंतजार करता है। दो घंटे के बाद रिपोर्टर को बुलाकर ए-वन कोच के गेट से अटेंडेंट कंबल से भरे दोनों झोले को देता है।
सवाल :  ट्रेन से कंबल आदि सामान गायब कैसे हो रहे है?
जवाब : कुछ यात्री होते हैं जो कंबल या बेडरोल लेकर चले जाते हैं।
सवाल : क्या आपको पता है कि एसी कोच का अटेंडेंट ही कंबल बेच देता है?
जवाब : ऐसा मामला तो सामने नहीं आया है।
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सवाल:  हमारे पास सबूत है?
जवाब : पकड़े जाने पर अटेंडेंट को गिरफ्तार किया जाएगा।
ट्रेन से कंबल गायब होने की जिम्मेदारी अटेंडेंट की होती है। एजेंसी द्वारा कंबल दिया जाता है। कंबल, बेडरोल या तकिया गायब होने पर 75% तक जुर्माने का प्रावधान है। ज्यादातर देखा जाता है कि यात्री ये सामान ले जाते हैं, कभी-कभी तो तौलिया तक नहीं छोड़ते। -दिलीप कुमार, सीनियर डीएमई, समस्तीपुर

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