कलेक्टर की नौकरी छोड़ ओपी चौधरी ने थामा था भाजपा का दामन, हारे

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रायगढ़। खरसिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के उमेश पटेल ने 8250 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा के फ्रेश चेहरे के रूप में चुनाव लड़ रहे ओपी चौधरी हार गए।
हारने के बाद उन्होंने समर्थकों के साथ उमेश पटेल की ओर बढ़कर उन्हें गले लगाकर बधाई दी। इस दौरान पुलिस पटेल के समर्थकों के हुजूम को नियंत्रित करने में लगी रही।
पुलिस को आशंका था कि कहीं दोनों समर्थक आपस में भिड़ न जाए। उमेश पटेल के समर्थकों ने ओपी चौधरी को देखते ही नारेबाजी शुरू कर दी थी। जैसे ही दोनों गले मिले माहौल बदल गया। ये देख पुलिसकर्मियों ने भी राहत की सांस ली।
कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल को हराना भाजपा के लिए कड़ी चुनौती थी।
झीरम घाटी हमले में नंदकुमार पटेल के शहीद होने के बाद इस सीट से उनके बेटे उमेश पटेल को जनता ने चुना था। ये सीट अब पटेल परिवार की मानी जाती है।
छत्तीसगढ़ के 2005 बैच के आईएएस ओपी चौधरी ने अपनी 12 साल की सर्विस को एक झटके में छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। चौधरी रायगढ़ जिले के बायंग गांव के रहने वाले हैं।
इस जिले से चयनित होने वाले वो पहले आईएएस अफसर हैं। अपने 12 साल के कार्यकाल में उन्होंने छत्तीसगढ़ में ऐसी कई योजनाओं पर काम किया जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया।
राजधानी स्थित प्रयास स्कूल चौधरी की ही देन मानी जाती है जहां नक्सल प्रभावित इलाकों के बच्चों को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई के साथ ही रहने के लिए भी सुविधाएं दी जाती है।
दंतेवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाके को एजुकेशन हब में बदल दिया था, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2011-12 में उन्हें प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया था।
विधानसभा खरसिया में अगासिया समुदाय के सर्वाधिक मतदाता हैं। इसके बाद वैश्य समुदाय के लोग आते हैं। ओपी चौधरी भी अगासिया समुदाय से हैं।
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कलेक्टर बनने के बाद तो उनकी ख्याति ऐसी फैली कि इलाके के कई नौजावन उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। ऐसे में भाजपा ने कांग्रेस के उमेश पटेल को हराने के लिए ओपी चौधरी का दांव खेला था जो खाली चला गया।

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