भरण-पोषण की प्राथमिक जिम्‍मेदारी पति की, भाग नहीं सकता: बॉम्‍बे हाईकोर्ट

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बॉम्‍बे हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस एमएस सोनक ने कहा कि पति और पत्नी एक समान जीवन यापन कर रहे थे। पत्नी के माता पिता के अमीर होने या सामर्त्थवान होने के आधार पर पति भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाने से इंकार नहीं कर सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्राथमिक तौर पर पति की जिम्मेदारी मेंटेनेंस उठाने की है और वह इससे भाग नहीं सकता। याचिका पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने पति को 75 हजार रुपए महीना देने को कहा है। जो 5 जनवरी 2011 से लागू होगा।
बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने एक बार फिर पति पत्नी के रिश्ते पर बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायाल ने कहा है कि पत्नी के भरण पोषण की प्राथमिक जिम्मेदारी पति की है और वह इससे भाग नहीं सकता। पत्नी ने बांद्रा की फैमिली कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती थी।
इससे पहले पारिवारिक न्यायालय ने पत्नी की मेंटेनेंस एप्लीकेश रिजेक्ट कर दिया था। पत्नी ने कोर्ट में कहा कि उसके पति ने उसे ग्रहस्थ जीवन से निकाल दिया है।
कोर्ट में महिला ने बताया कि उसकी कमाई वर्तमान समय में फ्रेंच ट्यूशन पढ़ाकर होती है। महिला ने बताया कि पति से रिश्ते खराब होने से पहले जिस लाइफस्टाइल में वह थी, वैसा जीवन यापन करना अभी की कमाई पर नामुमकिन है।
महिला ने 5 लाख महीना मेंटेनेंस का दावा किया था। वहीं पति ने दावा किया है कि उसकी कमाई 20 हजार रुपए महीना ही है।
हालांकि इस पर जस्टिस सोनक ने कहा, ‘रिकॉड को देखते हुए पति की कमाई 4 से 5 लाख रुपए सालाना है, यह मानना मुश्किल है।
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पति की लाइफस्टाइल के आधार पर वह एक लाख रुपए प्रति महीना आसानी से देने में सक्षम है। हालांकि, अगर पति प्रति माह 25 हजार से 30 हजार रुपये कमाता है तो अंतरिम रखरखाव प्रति माह 75,000 रुपये निर्धारित किया जाता है। यह उचित होगा’।

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