रघुराम राजन के शिष्य कृष्णमूर्ति होंगे देश के नए प्रमुख आर्थिक सलाहकार

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कृष्णमूर्ति इसी साल जुलाई में सेवा से मुक्त हुए अरविंद सुब्रमण्यम की जगह लेंगे। इससे पहले वह लगभग चार साल तक वित्त मंत्रालय में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इस दौरान उनके आर्थिक सर्वेक्षण और नीतियों को काफी सराहा गया। जीएसटी के संदर्भ में भी उनका काफी योगदान रहा है।
जाने-माने आर्थिक विशेषज्ञ और आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के शिष्य कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम को सरकार ने अगला प्रमुख आर्थिक सलाहकर नियुक्त किया है।
इंडियन बिजनस स्कूल (आईबीएस), हैदराबाद में पढ़ाने वाले कृष्णमूर्ति की पहचान आर्थशात्री की तो नहीं है। लेकिन, वित्त और बैंकिंग के क्षेत्र में उन्हें काफी विशेषज्ञता हासिल है। हालांकि, वह खुद को रघुराम राजन का छात्र बताते हैं और उनके बड़े प्रशंसकों में से एक हैं।
5 सितंबर, 2016 को शिक्षक दिवस के मौके पर ‘लाइव मिंट’ में लिखे अपने लेख के जरिए उन्होंने रघुराम राजन के विरोधियों पर चोट भी किया था। उन्होंने तब लिखा था, बहुत सारे लोग नीतियों के संबंध में बतौर प्रमुख आर्थिक सलाहकार राजन के प्रत्यक्ष योगदान को देखते हैं।
लेकिन, वह भारत को सन 2000 से अपना योगदान देते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर वह ‘इंडियन स्कूल ऑफ बिजनस'(आईएसबी) को खड़ा करने में 2001 में ही अहम योगदान दिया था। आज यह संस्थान दुनिया भर में अपनी विशिष्ठता के लिए जाना जाता है।”
इसके आगे कृष्णूर्ति इसी लेख में लिखते हैं, आर्थिक सलाहाकर या आरबीआई गवर्नर के पद को हासिल करने के बाद जिन लोगों के मन में ईष्या भाव है, उन्हें पता होना चाहिए कि आईएसबी को धरातल पर लाने में उनके (रघुराम राजन) योगदान को किसी अखबार के हेडलाइन में जगह तक नहीं मिली थी।”
कृष्णमूर्ति के मुताबिक तकरीबन 4 साल वित्त मंत्रालय में सेवा देने के बाद वह पारिवारिक कारणों से अमेरिका वापस चले गए। लेकिन, रिसर्च, लेखन और अध्यापन की रूचि उन्हें दोबारा हिंदुस्तान खींच लाई।
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वर्तमान में के. सुब्रमण्यम हैदराबाद स्थित आईएसबी में बतौर फाइनैंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और एग्जक्युटिव डायरेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन्होंने आईआईटी और आईआईएम में पढ़ाई करने के अलावा शिकागो से पीएचडी भी की है।

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