UAE से मनमोहन काल में हुए थे 9 प्रत्यर्पण और मोदी राज में हुए 3 प्रत्यर्पण

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सउदी अरब से मिशेल को बिना शर्त प्रत्यर्पण कर दिया गया। अब मोदी सरकार इसे बड़ी जीत के तौर देख रही है। हालांकि, इससे पहले की सरकारें भी प्रत्यर्पण करा चुकी हैं। 2002 से अब तक 20 लोगों को सउदी अरब से लाया जा चुका है।
जिनमें 9 प्रत्यर्पण 10 साल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए थे। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात से लाए गए क्रिश्चियन मिशेल का मामला अलग है। 2002 से अब तक हुए 20 में से 19 प्रत्यर्पण किए गए लोग भारतीय थे। जबकि मिशेल पहला गैर भारतीय है, जिसे यूएई से भारत लाया गया।
अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में मंगलवार (4नवंबर) रात संयुक्त अरब अमीरात से क्रिश्चियन मिशेल को प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया है। मिशेल को भारत लाने के बाद 3600 करोड़ रुपए के इस घोटाले में कई बड़े नामों के उजागर होने की संभावना केंद्र सरकार को है। लेकिन मिशेल किसी भी घूस से इंकार कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक, 2002 से अब तक 68 लोगों को भारत लाया चा चुका है। इनमें से 20 को यूएई से ही लाया गया है। इनमें से अटल बिहारी बाजपेई की सरकार (मई2004 तक) के दौरान 8 लोगों को भारत लाया गया। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के 10 साल में 9 लोगों को सउदी अरब से लाया गया। वहीं चार साल से केंद्र में बैठी मोदी सरकार अब तक तीन का प्रत्यर्पण ही करा पाई है।
द इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि, मिशेल ब्रिटिश नागरिक है। इसके बावजूद भारत ने ब्रिटिश सरकार को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी। जो इस मामले को पेचीदा बना सकता है। ब्रिटेन में ही विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी ने अपना ठिकाना बना रखा है। सरकार के अब ऐसे कदम से इन्हें भारत लाना और मुश्किल हो सकता है’।
मार्च 2018 में ही 1993 में हुए मुम्बई धामाकों के साचिशकर्ताओं में एक फारुख यासीन मंसूर उर्फ फारुख टकला को सउदी अरब से भारत लाया गया था। फारुख अंडरवर्ड डॉन दाउद इब्राहीम का करीबी है। साल 2015 के नवंबर में इंडियन मुजाहिदीन के कथित फाइनेंसर अब्दुल वाहिद सिद्दिबापा को भारत लाया गया था। उसे 2014 में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके खिलाफ यह कार्यवाई रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद हुई थी।
अगस्त 2013 में आतंकी गतिविधियों के चलते अब्दुल करीम टुंडा को यूएई से भारत लाया गया था। मुम्बई धमाकों के आरोपी इकबाल कासकर, इजाज पठान और मुस्तफा अहमद दोसा को 2002 और 2003 में प्रत्यर्पित किया गया था।
दिल्ली और अबू धाबी के बीच की कूटनीति ने अच्छी तरह से अपना काम किया। अब इस बारे में राजनयिकों का कहना है कि बड़े नेताओं की यात्राओं की बदौलत ही यह संभव हो सका। पीएम मोदी अगस्त 2015 में दुबई की ऐतिहासिक यात्रा पर थे।
यहां पर उन्होंने नई रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की। इसके बाद अबु धाबी के कॉउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 2016 की शुरुआत में भी भारत दौरे पर आए थे। इसके बाद प्रिंस 2017 के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर भी भारत आए थे।
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यूएई प्रशासन ने भारत सरकार की तरफ से प्रत्‍यर्पण का अनुरोध मिलने पर फरवरी 2017 में मिशेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही भारत सरकार उसे लाने के लिए कोशिशों में लगी हुई थी। इसके लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के बड़े अधिकारियों ने कई बार यूएई का दौरा किया और वहां घोटाले से जुड़े साक्ष्य, आरोप-पत्र, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेज रखे।

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