संविधान की राह बेहतर, वर्ना अराजक हो जाएगा माहौल: चीफ जस्टिस

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संविधान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए गोगोई ने कहा कि संविधान के सुझावों पर गौर करना हमारे लिए फायदेमंद है। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो लोगों के मतभेद अराजकता में तब्दील हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि संविधान हाशिए पर पड़े लोगों के साथ ही बहुमत के विवेक की भी आवाज है। यह अनिश्चितता और संकट के वक्त हमेशा मार्ग-दर्शक की भूमिका निभाता है।
देश में राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाए जाने की बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) रंजन गोगोई ने बड़ा बयान दिया है।
सीजेआई गोगोई ने कहा, “संविधान की बातों पर ध्यान देना हमारे सर्वश्रेष्ठ हित में है और अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो हमारा घमंड तेजी से अराजकता में तब्दील हो जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘संविधान भारत की जनता के जीवन का अभिन्न अंग बन गया है।
यह कोई अतिश्योक्ति नहीं है, अदालतें रोजाना जिस तरह से अलग-अलग मुद्दों पर सुनवाई करतीं हैं उसे लोगों को देखना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जब संविधान लागू किया गया था उस वक्त व्यापक पैमाने पर इसकी आलोचना हुई थी लेकिन वक्त ने आलोचनाओं को कमज़ोर किया और बेहद गर्व की बात है कि
पिछले कई दशक से इसका ज़िक्र बेहद जोश के साथ किया जा रहा है। चीफ जस्टिस ने कहा कि संविधान वक्त से बंधा सिर्फ दस्तावेज नहीं है और आज जश्न मनाने का नहीं बल्कि संविधान में किए गए वादों की परीक्षा लेने का वक़्त है।
वर्तमान व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “क्या हम भारतीय आजादी, समानता और गरिमा की शर्तों के साथ जी रहे हैं? ये ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें मैं खुद से पूछता हूं। निसंदेह काफी तरक्की हुई है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। आज हमें सिर्फ जश्न नहीं मनाना चाहिए बल्कि भविष्य के लिए एक खाका तैयार करना चाहिए।’’
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मामला फिर से तूल पकड़ रहा है। कुछ संगठन सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव भी बना रहे हैं। रविवार को ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सुप्रीम कोर्ट पर कटाक्ष किया था और कहा था कि
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कोर्ट की प्राथमिकता में राम मंदिर निर्माण पर फैसला देना नहीं है। भागवत ने कहा था कि बहुसंख्यक 30 सालों से धर्य रखे हुए हैं। लेकिन, आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कोर्ट से फैसला नहीं आता है, तो सरकार इस पर अध्यादेश लाए।

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