करतारपुर गलियारे के आधारशिला समारोह में नहीं जाएंगी सुषमा स्वराज

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आधारशिला समारोह में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सुषमा स्वराज को भी न्यौता भेजा था लेकिन उन्होंने समारोह में शामिल होने से मना कर दिया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शाह महमूद कुरैशी को धन्यवाद देते हुए कहा है कि
वह पहले तय कार्यक्रमों और प्रतिबद्धताओं के चलते समारोह में शिरकत नहीं कर सकेंगी। इनमें तेलंगाना विधानसभा चुनाव के मद्देनजर होने वाला चुनाव प्रचार भी है। सुषमा स्वराज समारोह में शामिल नहीं होंगी लेकिन केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और हरदीप सिंह पुरी करतारपुर गलियारे की आधारशिला कार्यक्रम में हिस्सा लेने अगले सप्ताह पाकिस्तान जाएंगे।
भारत के सीमावर्ती गुरदासपुर जिले को पाकिस्तान के करतारपुर के ऐतिहासिक गुरुद्वारे दरबार साहिब से जोड़ने के लिये करतारपुर गलियारे को मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए आधारशिला समारोह पाकिस्तान में आयोजित होगा।
आधारशिला समारोह का उद्घाटन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 28 नवंबर को करेंगे। बता दें सिख समुदाय लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि करतारपुर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे दरबार साहिब को भारत से जोड़ने के लिए गलियारा बनाया जाए। समारोह में शामिल होने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को भी आमंत्रित किया गया है।
बता दें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी करतारपुर गलियारा बनाए जाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस गलियारे के दोनों देशों के लोगों के बीच पुल का काम करने संबंधी बयान के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने चेताया कि इस लक्ष्य को हासिल किये जाने से पहले अभी कई बाधाओं को पार करना है।
प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘‘टूवार्ड्स पीस, हारमोनी एंड हैप्पीनेस : ट्रांजिशन टू ट्रांसफॉर्मेशन’’ सम्मेलन से इतर उन्होंने संवाददाताओं को बताया, ‘‘इसमें कई बाधाएं हैं और इन अड़चनों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। लेकिन कोई भी शुरुआत अच्छी शुरुआत होती है, मुझे उम्मीद है यह सफल होगी।’’ सिंह ने हालांकि यह नहीं बताया कि
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वह किन अड़चनों के बारे में सोच रहे हैं। पहले सिख गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर शुक्रवार को मादी ने कहा, ‘‘क्या किसी ने कभी सोचा था कि र्बिलन की दीवार गिरेगी? हो सकता है गुरु नानक देवजी के आशीर्वाद से करतारपुर गलियारा सिर्फ गलियारा न रहे बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच पुल की तरह काम करे।’’

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