गौरी लंकेश मर्डर केसः 5 साल से साजिश रच रही थी सनातन संस्था!

0 3
एसआईटी ने इसमें सनातन संस्था नाम के हिंदू संगठन का जिक्र किया है। शुक्रवार (23 नवंबर) शाम प्रिंसिपल सिवल एंड सेशंस कोर्ट में जमा की गई चार्जशीट में दावा किया गया कि लंकेश की हत्या की साजिश लगभग पांच सालों से रची जा रही थी।
पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने बेंगलुरू स्थित सिटी कोर्ट में 9,235 पन्नों की एडिश्नल चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट के मुताबिक, गोवा में सनातन संस्था के सदस्यों ने पत्रकार को बगैर किसी निजी कारण के निशाना बनाया था। एसआईटी में एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार (24 नवंबर) को पीटीआई से कहा, “सनातन संस्था के कार्यकर्ता इस हत्याकांड में शामिल हैं। हमने उनके नाम और उनसे जुड़े संगठनों का जिक्र चार्जशीट में किया है।”
वहीं, इस चार्जशीट पर सनातन संस्था ने इन आरोपों को खारिज किया। पीटीआई को संस्था के मीडिया प्रभारी चेतन राजहंस ने फोन पर बाताया- आरोपियों में से कोई भी हमारी संस्था का सदस्य नहीं है। अभी तक, एसआईटी ने यह बात आधिकारिक तौर पर नहीं कही है। अगर एसआईटी हमारे नाम का जिक्र सप्लीमेंट्री चार्जशीट में करती है, तो हम कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे। पर अभी तक हमें चार्जशीट की कॉपी नहीं मिली है।
राजहंस ने इसके अलावा कहा, “अगर कोई बिना सबूतों के हमारे संगठन के नाम या छवि को खराब करने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।” उप-मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने इस मसले पर शनिवार को कहा कि राज्य सरकार हत्या में लिप्त संगठनों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर जल्द ही फैसला लेगी। बकौल, परमेश्वर, “अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। पर जल्द हीइस पर रुख साफ किया जाएगा।”
विशेष सरकारी वकील एस बालन ने पीटीआई से कहा, “हत्यारों व लंकेश के पीछे कोई निजी दुश्मनी या और कोई बैर नहीं था। फिर उनकी हत्या क्यों हुई? क्योंकि वह एक खास किस्म की विचारधारा में यकीन रखती थीं और उस पर मुखर होकर बोलती थीं। ऐसे में यह एक विचारधारा और एक संगठन होगा, जिसकी वजह से यह हत्या हुई।” एसआईटी ने मामले में और आगे की जांच-पड़ताल के लिए अनुमति मांगी है।
बता दें कि बीते साल पांच सितंबर को वामपंथी विचारधारा रखने वाली 55 वर्षीय पत्रकार की हत्या उनके घर के बाहर कर दी गई थी, जिसके बाद देश भर में विरोध के स्वर मुखर हुए इस हमले की भरसक निंदा की गई। बाद में सिद्धारमैया की सरकार ने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी।
यह भी पढ़ें: शीतकालीन सत्र से पहले, एक और दल भाजपा से तोड़ सकता है रिश्ता?
एसआईटी सूत्रों की मानें तो अब तक इस मामले में 18 लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, जिनमें गोली चलाने वाले परशुराम वाघमरे, हत्या के मास्टर माइंड अमोल काले, सुजीत कुमार उर्फ प्रवीण और अमित देगवेकर शामिल हैं। कुख्यात गैंग पर आरोप है कि ये लेखक एम.एम कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं में भी शामिल रहे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More