शिवराज सरकार अपने ही दौर के विवादों में घिरी हुई है

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असली परीक्षा 28 नवंबर को होनी है जिसके नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे। हालिया दौर में जिन मसलों को लेकर उनका नाम खासा विवादों में रहा उन पर एक नजर डालते हैं।
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब सिर्फ एक हफ्ता बचा है। राज्य में करीब 13 साल के अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने कई दफा ऐसे मौके आए जब
उनकी मजबूत छवि के बावजूद सिंहासन डांवाडोल होने की आशंका जाहिर की जाने लगी। हालांकि वे उस समय तो वे इन सबसे बचकर निकलने में कामयाब रहे
किसान आंदोलन
छह जून 2017 का दिन मध्य प्रदेश के इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस दिन मंदसौर जिले में शुरू हुए किसान आंदोलन ने धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर लिया। कई दिनों तक शहर बंद रहा और लगभग कई हफ्तों तक जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। सरकार के खिलाफ किसानों का गुस्सा चरम पर था।
जिसकी शुरुआत मंदसौर से हुई धीरे-धीरे यह नीमच, शाजापुर और इंदौर के आसपास के कई इलाकों में फैल गया। इस आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद यह मसला राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के लिए मुसीबत बन गया।
बाद में शिवराज सिंह ने डैमेज कंट्रोल के लिए मारे गए किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का वादा किया। इसके साथ ही सभी की उनके गांवों में प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं। मुआवजे की रकम पर भी काफी बवाल मचा और
इसे लेकर आम करदाताओं ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना गुस्सा जाहिर किया था। इस आंदोलन का असर इस चुनाव में भी देखा जा रहा है, इसीलिए भाजपा ने इलाके में अपने स्टार प्रचारकों की फौज उतार रखी है।
 नर्मदा सेवा यात्रा
11 दिसंबर 2016 को अमरकंटक से शुरू होकर करीब 3,344 किमी की यात्रा तय करने के बाद यह यात्रा 15 मई 2017 को समाप्त हुई। इस यात्रा का मकसद नर्मदा को स्वच्छ बनाने के लिए दोनों किनारों पर हजारों-लाखों पौधे लगाने का था। ‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ तब निशाने पर आई जब इसमें अनाप-शनाप खर्च करने का आरोप लगाया गया।
पहले कांग्रेस नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और फिर भाजपा से रूठे उसी के पूर्व राज्यमंत्रियों ने इसे निशाने पर लिया। बताया जाता है कि इस यात्रा में जगह-जगह आरतियों के आयोजन और प्रचार-प्रसार पर जमकर खर्च किया गया।
सूचना के अधिकार के तहत सामने आई जानकारी में पता चला कि महेश्वर के घाट पर हुए एक आरती में करीब 59 हजार रुपए खर्च हुए थे।
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इस हिसाब से पैसों के दुरुपयोग का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह यात्रा 118 दिन चली थी और हर दिन दो बार आरती हुई थी।

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