दंतेवाड़ा नक्सली हमला : मोर मुकुट शर्मा पूरी कहानी उनके खुद की जुबानी

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जैसा कि आपको जानकारी होगी कि मंगलवार को छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर थाने के अंतर्गत नीलावाया जंगल में नक्सलियों ने चुनाव ड्यूटी पर निकले दल पर हमला कर दिया था। इस हमले में दो जवानों के साथ ही एक मीडियाकर्मी की भी मौत हो गई। हमले के दौरान एक अन्य मीडियाकर्मी ने एक छोटा सा वीडियो बनाया, जो आज वायरल हो रहा है।
मोर मुकुट शर्मा की जुबानी पूरा घटनाक्रम
प्रशासन ने हमें 150-200 की संख्या में फोर्स दी थी, लेकिन जिस प्वाइंट से हमें एक गांव में जाना था। वहां से हमें 5 बाइक मिलीं। तीन बाइक के पीछे हम तीन पत्रकार बैठ गए और उन्हें फोर्स के जवान चला रहे थे। बाकी की दो बाइक पर फोर्स के जवान बैठे थे, यानि कुल मिलाकर 10 लोग उस गांव में जा रहे थे।
इस दौरान हम वहां सड़क के आसपास लगे पोस्टरों को शूट करने लगे। रास्ता बहुत ज्यादा खतरनाक था। सड़क की बाईं तरफ एक खेत था, जिसमें फसल लगी हुई थी। हमने बाइक रोककर वहां वीडियो शूट किया। इसके बाद जैसे ही हम लोग मोटरसाइकिलों पर वापस बैठे तो
उस खेत में छिपे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। कैमरामैन अच्युत्यानंद साहू की बाइक सबसे आगे थी। जैसे ही नक्सलियों ने हमला किया, उनकी बाइक गिर गई।
इसके बाद जोरदार गोलीबारी होने लगी। हम लोग किसी तरह सड़क की दायीं ओर एक खड्ड में चले गए। अब नक्सलियों और हमारे बीच 25-30 फिट की एक सड़क थी।
वीडियो के बारे में बात करते हुए मोर मुकुट शर्मा ने बताया – वीडियो बनाने से पहले मुझे बहुत प्यास लग रही थी। मैंने अपने साथियों से कहा कि मुझे पानी पिला दो, इस पर उन्होंने कहा, अभी कुछ नहीं मिलेगा। ऐसा लगा गला बिल्कुल सूख रहा है।
मुझे लगा मेरी मौत बिल्कुल सामने है। मैंने सोचा मेरा कैमरामेन साथी मारा गया है, मेरे पास इतना समय नहीं है। इन पलों को कैमरे में कैद कर लूं। बस मैं अपने मोबाइल से वीडियो शूट करने लगा। इस बीच मुझे मां की याद आने लगी।
मैं गीता पढ़ता हूं तो मैंने गीता सार याद करके खुद को ढांढस बधाया। मैंने सोचा हे प्रभु, लगता है शायद यहीं तक मेरा जीवन था, आपके बेहद करीब आ गया हूं। वीडियो शूट करने के बाद भी मैंने ईश्वर को ही याद किया।
यह वीडियो बीच में ही अचानक बंद हो जाता है। ऐसे में यह आशंका घेर लेती है कि क्या नक्सली वहां पहुंच गए थे या कुछ और… इस पर मोर मुकुट ने बताया- जहां पर मैं लेटा हुआ था, वहां लाल चींटियों का झुंड था।
चींटियां मेरे शरीर पर रेंगने लगीं, इसलिए मुझे अचानक से बीच में ही वीडियो बंद करना पड़ा। अगर चींटियों से बचने के लिए हिलता-डुलता या हाथ ऊपर करता तो नक्सली उधर से फायर कर देते। नक्सलियों ने गोलियां दागकर उस पेड़ को छलनी कर दिया, जिसके नीचे हम छिपे हुए थे।
वहां करीब 40 मिनट तक फायरिंग होती रही। ऐसी भयावह आवाजें तो मैंने सिर्फ फिल्मों में ही सुनी थीं और उन आवाजों से पूरा जंगल गूंज रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे सैकड़ों नक्सलियों ने एक साथ हमला बोल दिया है।
हमारे साथ सिर्फ 7 जवान थे, उनमें से भी दो शहीद हो चुके थे। जो सैनिक मुख्य सड़क तक साथ आए थे, उन्होंने किसी तरह मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला, उसके बाद नक्सली वहां से जंगल में भाग गए।
मोर मुकुट शर्मा ने बताया कि उन्हें मामूली चोटें आयी हैं। उन्होंने बताया कि साहू को सिर में गोली लगी थी, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। शर्मा ने वहां के मंजर पर और रोशनी डालते हुए बताया कि नक्सलियों ने साहू की गर्दन को भी पीछे से काट दिया था।
अचानक हुई गोलीबारी के दौरान एक सैनिक गलती से बाईं ओर चला गया, जहां नक्सली छिपे हुए थे। नक्सलियों ने उस सैनिक को वहीं मार दिया। उन्होंने बताया कि उनके साथ एक और पत्रकार वहां छिपे हुए थे और एक सैनिक ने मोर्चा संभाल रखा था।
40 मिनट किसी तरह वहां पड़े रहे। इस दौरान उन्हें प्यास भी लग रही थी, तो एक बार तो मोर मुकुट शर्मा को लगा कि सर्वाइवल ट्रिक्स के तहत वे खुद की पेशाब पी लें, लेकिन फिर लगा कि अगर ज्यादा देर ऐसे ही छिपे रहना पड़ा तो इस विकल्प का इस्तेमाल बाद में करेंगे।
यह वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इसके साथ ही एक अन्य वीडियो भी इस दौरान शूट किया गया था, जिसमें हमले के तत्काल बाद पुलिस टीम के सदस्य अपने घायल साथियों को संभालते नजर आ रहे हैं।

इस हमले में दो पुलिस जवान शहीद हुए और दूरदर्शन के एक कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत हो गई। फायरिंग के दौरान शहीद जवान का एके-47 और मीडियाकर्मी का कैमरा नक्सली लूटकर ले गए।
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मौके पर मिले खून के धब्बों से अधिकारी दो नक्सलियों के भी मारे जाने की उम्मीद जता रहे हैं।

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