राकेश अस्थाना ने भी कसा मोदी सरकार पर कानूनी शिकंजा

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राकेश अस्थाना ने भी अब मोदी सरकार पर कानूनी शिकंजा कस दिया है। वह सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं। राकेश अस्थाना का कहना है कि उनको सीबीआई के नंबर दो होने के बावजूद फोर्स लीव पर भेजना गैर संवैधानिक है।
वहीं सीबीआई में चल रहे पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को भी नोटिस भेज दिया है।
सीबीआई ने साफ किया है कि आलोक वर्मा डायरेक्‍टर रहेंगे और राकेश अस्‍थाना भी नंबर 2 बने रहेंगे। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसा तब तक ही रहेगा, जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इस मामले की जांच नहीं कर लेता।
सरकार ने मंगलवार रात वर्मा और सीबीआई में नंबर 2 अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया। सीबीआई के 55 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए 2 हफ्ते का वक्त दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि देश हित के मसले को लंबा नहीं खींचा जा सकता है। सीबीआई ने साफ किया है कि नागेश्वर राव सीबीआई का सिर्फ रुटीन काम देखेंगे।
वह कोई नीतिगत फैसला नहीं करेंगे। सीजेआई जस्टिस गोगोई ने अपने आदेश में कहा कि मामले की अगली सुनवाई होने तक सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर नीतियों से संबंधित कोई बड़ा फैसला नहीं करेंगे।
केंद्र के छुट्टी के आदेश के खिलाफ आलोक वर्मा की अर्जी पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हम मामले को देखेंगे। उन्होंने कहा कि हमें देखना होगा कि किस तरह का अंतरिम आदेश पारित करना पड़ा है।
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सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा का पक्ष रख रहे फली नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, ‘सीवीसी और केंद्र सरकार का आदेश बिना किसी कानूनी प्राधिकार के था।’

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