अगला लोकसभा चुनाव महागठबंधन और जनता के बीच होगा: PM मोदी

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नई दिल्ली। मोदी विरोध के नाम पर बन रहे गठजोड़ पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगला चुनाव महागठबंधन और जनता के बीच होगी।
एक एजेंसी को दिये साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने राम मंदिर, किसान कर्ज माफी, सर्जिकल स्ट्राइक, महागठबंधन, पाकिस्तान, जीएसटी, नोटबंदी, पांच राज्यों में भाजपा की हार से लेकर मॉब लिंचिंग समेत सभी विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव के पहले विपक्ष की घेराबंदी चुनावी मुद्दों पर खुलकर बात की। विपक्ष की ओर से महागठबंधन की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा आखिरकार यह क्यों बन रहा है।
इनके पास देश के सामाजिक आर्थिक मुद्दों को लेकर कोई स्पष्ट विचार नहीं है। उनका एक मात्र निशाना मोदी है और सभी खुद को बचाने के लिए एक-दूसरे को सहारा दे रहे हैं।
अगले चुनाव को जनता बनाम महागठबंधन के बीच की टक्कर बताते हुए कहा कि देश की जनता चुनाव की दिशा और उसका एजेंडा तय करने वाली है।
जनता तय करेगी कि उसकी आकांक्षा के साथ कौन है। प्रधानमंत्री ने ‘मोदी लहर’ कम होने के विपक्ष के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कम-से-कम वे लहर मान तो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका मानने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार तेलंगाना और मिजोरम में भाजपा कहीं थी ही नहीं।
वहीं मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15 सालों के सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे थे। लेकिन इसके साथ ही त्रिपुरा, हरियाणा असम और जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को भारी सफलता भी मिली है। असम और त्रिपुरा में तो गठबंधन को धूल चाटनी पड़ी।
राजग में सहयोगियों की कमी के आरोप खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा को कई नए साथी मिल रहे हैं। इसीलिए पांच राज्यों के चुनाव परिणाम से आत्मविश्वास गिरने का कोई कारण नहीं है। आत्मविश्वास से आगे बढ़ रही है।
अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत से कम सीटें मिलने की अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के चुनाव के पहले भी मीडिया में इस तरह की खबरें छप रही थी।
उन्होंने कहा कि उस समय जो लोग ऐसा कह रहे थे, वहीं लोग इस समय भी कह रहे हैं। भाजपा के जनाधार को सीमित बताने की मानसिकता को तीन दशक पुरानी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह पूरे देश और सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व करती है।
संघ परिवार और खास कर सरसंघचालक मोहन भागवत की ओर राम मंदिर पर अध्यादेश की मांग को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में अंतिम चरण में है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस से जुड़े वकील कोर्ट के भीतर अड़ंगा लगाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने देश में शांति, सुरक्षा और भाईचारे की दुहाई देते हुए कांग्रेस से अपने से जुड़े वकीलों से अड़ंगा लगाने से रोकने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने तीन तलाक पर अध्यादेश से राम मंदिर से जुड़े अध्यादेश की तुलना को भी खारिज कर दिया। उनके अनुसार तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश लाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमली जामा पहनाने के लिए अध्यादेश के जरिये कानून लाना जरूरी हो गया था। जबकि राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अभी चल रही है।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी जम्मू-कश्मीर में पाक पोषित आतंकवाद में कमी नहीं और सीमा पर गोलीबारी जारी रहने के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एक लड़ाई से पाकिस्तान सुधरने वाला नहीं है।
इसके लिए लंबी रणनीति पर काम चल रहा है। लेकिन उन्होंने इस रणनीति को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अलग-थलग करने में सफलता मिली है।
सर्जिकल स्ट्राइक के राजनीतिकरण पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे पहले विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठा दिया था और उसी दिन से इस पर राजनीति शुरु हो गई। यहां तक कि सेना के लिए अनापशनाप शब्दों का प्रयोग किया गया।
जबकि इसे सफलतापूर्वक अंजाम देने पर सेना पर गर्व किया जाना चाहिए था। सर्जिकल स्ट्राइक के फैसले और उसके क्रियान्वयन पर विस्तार से बोलते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह उरी हमले ने उनके साथ-साथ सेना को बेचैन कर दिया था। इसी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी तैयारी की गई।
उन्होंने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक के एक-एक पल की जानकारी वे खुद ले रहे थे और जवानों को किसी भी स्थिति में सुबह होने के पहले वापस लौटने का निर्देश दिया था। लेकिन सुबह होने के एक घंटे बाद तक का समय सबसे मुश्किल रहा, जब स्ट्राइक के लिए जवानों की कोई सूचना नहीं मिल रही थी।
लगभग दो घंटे बाद पता चला कि वे सीमा के भीतर तो नहीं, लेकिन सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए हैं। उनके वापस लौटने के बाद सुरक्षा से संबंधित कैबिनेट कमिटी की बैठक हुई और पाकिस्तान को इसकी जानकारी दी गई।
वैसे प्रधानमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि वे पाकिस्तान के साथ बातचीत के खिलाफ नहीं है। लेकिन आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकता है। सार्क शिखर वार्ता में बुलाये जाने पर पाकिस्तान जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जब समय आएगा, उस समय बताएंगे।

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