बेटियों को कोख में मारने वाला डॉक्टर हिस्ट्रीशीटर घोषित; जेल गया, निलंबित हुआ, फिर भी नहीं छोड़ा बेटियों को मारना

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जोधपुर। बेटियों का कोख में ही दम घोंटने वाले डॉ. मोहम्मद इम्तियाज रंगरेज  (41) को पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर डॉक्टर घोषित कर दिया। किसी डॉक्टर के हिस्ट्रीशीटर घोषित होने का प्रदेश सहित संभवत: देश में पहला मामला है।
इम्तियाज पर पिछले सात साल में जोधपुर जिले में ही पांच हजार भ्रूण लिंग परीक्षण करने का आरोप है। उसे जोधपुर के नागौरी गेट थाने का हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है। डॉ. इम्तियाज 2016 में पहली बार भ्रूण जांच परीक्षण करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।
उस समय वह बालेसर सीएचसी का प्रभारी था। उसे जेल हुई और निलंबित कर दिया गया। लेकिन जेल से छूटते ही वह भ्रूण जांच के घिनौने धंधे में फिर से जुट गया।
वह अलग-अलग समय में चार बार इस तरह के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। उसके पिता डॉ. नियाज भी बेटियों के कोख में ही कत्ल के इस धंधे में शामिल रहे हैं।
पहली बार : 7 अक्टूबर 2016 को डॉ. इम्तियाज अपने साथी भैरोंसिंह के घर पर भ्रूण परीक्षण करते पकड़ा गया था। उस वक्त इम्तियाज बालेसर सरकारी अस्पताल के इंचार्ज पद पर तैनात था। उसे निलंबित कर दिया गया।
दूसरी बार : 21 मई 2017 को इम्तियाज ने अपने दलाल साथी हनुमान ज्याणी के घर उसके साथी सदस्यों संजय त्यागी, सोहन जाट और राजू के मार्फत गर्भवती को बुलाया। जांच कर लड़की बताई। गिरफ्तार किया गया।
तीसरी बार : 5 जनवरी, 2018 को इम्तियाज की गैंग ने एक गर्भवती को पहले झुंझुनूं, फिर सीकर, फिर नागौर और बाद में जोधपुर बुलाया। रेलवे स्टेशन के पास चलती गाड़ी में जांच की, लेकिन पकड़ में आ गया।
चौथी बार : 9 सितंबर, 2018 को डॉ.इम्तियाज अपने दलाल फतेहकिशन के साथ महामंदिर स्थित एक मकान में एक गर्भवती का भ्रूण परीक्षण पकड़े गए। खास दलाल हनुमान ज्याणी इस बार भी फरार हो गया।
मोहम्मद इम्तियाज और उसके पिता डॉ. नियाज रंगरेज दोनों ही भ्रूण जांच कर गर्भपात करने का पैकेज लेने के लिए कुख्यात थे। पिता और बेटे जांच के लिए 25 से 30 हजार रुपए लेते थे।
बाद में इतनी ही राशि गर्भपात के लिए वसूलते थे। इम्तियाज का पिता भी 2012, 2014 और 15 अगस्त 2016 को लिंग जांच करते पकड़ा जा चुका है।
मूलतया उदय मंदिर कर्नल साहब की हवेली हाल कमला नेहरू नगर एलआईजीएच 83बी निवासी इम्तियाज वर्ष 2016 में पहली बार लिंग परीक्षण करते हुए गिरफ्तार होने के बाद से ही निलंबित है।
इसके बाद वह तीन बार और गिरफ्तार हुआ, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने उसे बर्खास्त करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। डॉक्टरी का तमगा भी उसके साथ है।
विशेषज्ञों की मानें तो विभाग के जिम्मेदार 16 सीसीए के तहत चार्जशीट देकर बर्खास्तगी की औपचारिकताएं पूरी कर सकते हैं। हालांकि, डॉक्टरी का तमगा कोर्ट से सजा होने के बाद ही छीना जा सकता है।
एनएचएम के निदेशक नवीन जैन के अनुसार सर्विस रूल्स में 16 सीसीए के तहत चार्जशीट देकर उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई डायरेक्टरेट से ही की जा सकती है।
डॉ. इम्तियाज के निता नियाज के मकराना में अस्पताल, जाेधपुर सहित कई शहरों में मकान व जमीनें हैं। वह करीब 100 करोड़ रु. की संपत्ति का मालिक बताया जाता है।
पुलिस की वेबसाइट पर इम्तियाज अब हिस्ट्रीशीटर के तौर पर दिखाई देगा। जब भी पुलिस बुलाएगी, उसे पेश होना पड़ेगा। पुलिस उसके घर की समय-समय पर जांच भी कर सकती है।
बता दें कि कोई भी शख्स, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड हो, वो समाज के लिए खतरा बन गया हो। समाज हित में उस पर नियमित निगरानी जरूरी मानी जाती है, तब ऐसे व्यक्ति के खिलाफ पुलिस हिस्ट्रीशीट खोलती है।
जोधपुर में डीसीपी ईस्ट डॉ. अमनदीप सिंह कपूर की पहल पर ही मोहम्मद इम्तियाज को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है। डीसीपी अमनदीप ने खुद डॉक्टरी की डिग्री ले रखी है।
उन्होंने कहा कि डॉ. इम्तियाज लिंग जांच कर अवैध रूप से गर्भपात करवाने जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहा था। उसके खिलाफ चार केस कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके बावजूद वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा था।
उसकी आपराधिक गतिविधियां बढ़ती जा रही थीं। इस बदमाश व्यक्ति की बढ़ती हुई आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण व आम जनता की सुरक्षा के लिए निगरानी रखकर अंकुश लगाया जाना जरूरी हो गया था।

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