फ्रॉड करने का नया तरीका, पहले गाड़ी बेचते हैं और दो महीने बाद उसी गाड़ी को चुरा लेते हैं

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भोपाल। धोखाधड़ी करने का एक नया तरीका सामने आया है। जालसाज पहले अपनी कार बेचते हैं और बाद में उसे वाहन खरीदने वाले के घर के बाहर या अन्य स्थान से चोरी कर लेते हैं।
ऐसे मामलों में पुलिस भी कार्रवाई करने से यह कहते हुए इनकार कर देती है कि यह आपका आपसी मामला है, इसे बाहर ही निपटाएं।
ऐसा ही एक मामला हबीबगंज थाने का है। जिसमें एक व्यक्ति ने रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करके 2.50 लाख रुपए में कार खरीदी, लेकिन दो महीने बाद कार घर के बाहर से चोरी हो गई।
अब बिक्रेता का कहना है कि रकम वापस चाहिए तो थाने में बात करो। थाने में शिकायत की गई तो पुलिस ने इस बारे में कार्रवाई करने से साफ मना कर दिया।
उक्त व्यक्ति पिछले तीन महीने से न्याय के लिए थाने के चक्कर लगा रहा है। धोखाधड़ी का एक मामला चार दिन पहले भी सामने आया जिसमें पीड़ित खुद चोरी गई कार को खोजकर लाया। यह कार भी वाहन के पुराने मालिक ने क्राइम ब्रांच के पास से चोरी की थी।
ई-7 अरेरा काॅलोनी निवासी अनिरुद्ध सिंह रघुवंशी ने 2 जून 2018 को रेलवे काॅलोनी, निशातपुरा निवासी सौरभ कुमार राज से मारुति इग्निस कार (एमपी04-सीएस-7305) का ढ़ाई लाख में सौदा किया था। अनिरुद्ध ने एग्रीमेंट के समय सौरभ को 1.60 लाख रुपए दिए थे। 60 हजार रुपए किश्तों में अदा किए गए थे।
शेष राशि फाइनेंस कंपनी से एनओसी मिलने के बाद देना तय हुआ था। इसके बाद 2 जून से 27 सितंबर तक कार अनिरुद्ध के पास थी। 28 सितंबर की सुबह कार अनिरुद्ध के घर के बाहर से गायब थी।
कार में उनके जरूरी दस्तावेज, सोने की चेन आदि रखी थी। अनिरुद्ध हबीबगंज थाने में इस बीच पता चला कि सौरभ कुमार दूसरी चाबी से कार अनिरुद्ध के घर बाहर से उन्हें बिना बताए उठाकर ले गए हैं।
अनिरुद्ध का कहना है कि तत्कालीन थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह चौहान ने दोनों पक्षों की बात सुनी और इसके बाद उनका कहना था कि इस मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करेगी, आपस का मामला है बाहर निपटा लीजिए।
पुलिस ने बड़ी मुश्किल से आवेदन लिया, लेकिन तीन महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सीएसपी को भी आवेदन देकर उनसे मिल चुका हूं। तब से थाने के चक्कर लगा रहा हूं।
विक्रेता  द्वारा वाहन क्रेता के घर से वाहन चोरी करने का मामला अभी मेरी संज्ञान में नहीं आया है। मामला संज्ञान में आने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जो भी व्यक्ति और पुलिस अधिकारी दोषी पाएगा जाएगा उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। धर्मेंद्र चौधरी, डीआईजी

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