रिटायर्ड आईपीएस ने आदिवासी छात्राओं के हॉस्टल के लिए, अपनी जमा पूंजी में से एक करोड़ रुपए दान कर दिए

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भोपाल। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी महेंद्र शुक्ला ने जमा पूंजी में से एक करोड़ रुपए दान कर दिए ताकि होशंगाबाद जिले में अपने गांव की आदिवासी छात्राओं के लिए हॉस्टल बन जाए।
इस राशि से होशंगाबाद जिले के ग्राम दुप्पन में एक हॉस्टल बन रहा है। शुक्ला मूल रूप से होशंगाबाद जिले के धर्मकुंडी गांव के रहने वाले हैं।
शुक्ला ने ई-3 अरेरा कॉलोनी स्थित बंगला बेचकर खुद के रहने के लिए छोटा सा फ्लैट खरीद लिया। शेष राशि भविष्य की जरूरत के हिसाब से फिक्स डिपॉजिट कर रखी थी। दो साल पहले 75 वीं वर्षगांठ पर पत्नी आशा शुक्ला के कहने पर उन्होंने 75 लाख रुपए की पहली किस्त दान कर दी।
यहां सेवा भारती हॉस्टल का निर्माण कर रही है। सेवा भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री रामेंद्र सिंह के अनुसार शुक्ला दंपती से शेष 25 लाख रुपए भी मिल चुके हैं। छात्रावास के निर्माण पर कुल ढाई करोड़ रुपए खर्च होंगे।
शुक्ला 1982 मेंं बिलासपुर (अब छग) में डीआईजी थे। उस दौरान वे गांवों का दौरा करने जाते थे। कई बार पत्नी भी साथ में रहती थीं। वे बताती हैं कि उस समय उन्होंने देखा कि तीन-तीन आदिवासी महिलाएं बारी-बारी से एक ही कपड़ा पहन कर बाहर आती हैं।
इस गरीबी से मन व्यथित हो गया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी ने आदिवासी क्षेत्र में सेवा करने का निर्णय लिया। उन्होंने मप्र और छग से लेकर सुदूर उत्तर- पूर्व और कश्मीर के वनांचलों में एकल विद्यालय शुरू किए।
गांव पहुंचकर लिया संकल्प
2002 में रिटायर होने पर वे अपने गांव धर्मकुंडी पहुंचे, वहां संकल्प लिया कि अब अपनी जन्मस्थली के लिए कुछ करेंगे। फिर भोपाल में बस गए। यहां पत्नी आनंदधाम वृद्धाश्रम से जुड़ गईं। आनंद धाम और सेवा भारती के कई छोटे- बड़े खर्चे शुक्ला दंपती पूरे करते हैं।
भगवान की आरती के बाद पत्नी ने मांग लिए 75 लाख
2016 में महेंद्र शुक्ला की 75वीं वर्षगांठ थीं। आशा शुक्ला बताती हैं एक दिन सुबह घर में भगवान की आरती के करते हुए उन्हें 2002 में लिया संकल्प याद आया।
उन्होंने पति से कहा – ‘आप अपनी 75वीं वर्षगांठ पर अपने गांव में हॉस्टल बनाने के लिए 75 लाख रुपए नहीं दे सकते क्या?’ इस पर पति ने कहा कि यह राशि उन्होंने आपात स्थिति के लिए रखी है। इस पर आशा ने कहा कि अपने जीवन में ऐसी आपात स्थिति नहीं आएगी।
हम दोनों अंतिम समय तक स्वस्थ रहेंगे।’ इस पर शुक्ला 1 करोड़ देने पर सहमत हो गए। उसी दिन शाम 4 बजे तक उन्होंने 75 लाख का चेक सौंप दिया। कुछ दिन बाद 25 लाख रुपए भी दे दिए।
  1. अनाथों के बने नाथ मेजर जनरल से रिटायरमेंट के बाद 200 बेसहारा बच्चों का जीवन संवार रहे श्याम श्रीवास्तव
    देश की दूसरी और मप्र की पहली आईपीएस अधिकारी आशा गोपाल ने भोपाल में अनाथ बच्चों को घर जैसा वातावरण मुहैया कराने के लिए नित्य सेवा सोसायटी की शुरुआत की थी। अब उनके भतीजे श्याम श्रीवास्तव इस प्रोजेक्ट को संभाल रहे हैं। सोसायटी में इस समय 200 अनाथ बच्चे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई से लेकर उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग कराने और नौकरी दिलवाने तक का काम सोसायटी कर रही है।  श्याम श्रीवास्तव ने 1976 में मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ टेक्नालॉजी (अब मैनिट) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद आर्मी ज्वाइन कर ली। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के प्रोजेक्ट में शामिल रहे श्रीवास्तव 2014 में आर्मी के मेजर जनरल की पोस्ट से रिटायर हुए। दो साल तक मुंबई में रहने के बाद वे 2016 में भोपाल आ गए। यहां उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस में सिलेक्शन सहित अन्य काम्पटीटिव एक्जाम के लिए एक कोचिंग भी शुरू की।

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