1000 करोड़ रु. की फेंटानिल ड्रग्स के साथ चार गिरफ्तार, केवल 2 मिलीग्राम मात्रा से जा सकती है जान

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मुंबई। महाराष्ट्र पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने बुधवार को वाकोला इलाके से फेंटानिल नाम की प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। फेंटानिल इतनी खतरनाक है कि इसकी महज 0.002 ग्राम (2 मिलीग्राम) मात्रा ही किसी की जान ले सकती है।
नारकोटिक्स विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के नाम सलीम डोला, घनश्याम सरोज, भाई चंद्रमणि और संदीप तिवारी हैं। आरोपी ड्रग्स को दूसरे देशों में बेचने की फिराक में थे। दलालों के संपर्क में भी थे।
आरोपियों के पास से ड्रग्स से भरे चार ड्रम जब्त हुए हैं। कोर्ट ने आरोपियों को 1 जनवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
डोला को एक बार पहले भी राजस्व खुफिया निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था।
आरोपियों ने कोर्ट में दावा किया कि उनके पास से जब्त किया गया पदार्थ फेंटानिल नहीं है। साथ ही उनके पास इसकी खरीदी के दस्तावेज भी हैं।
फेंटानिल का इस्तेमाल एनेस्थीसिया और कैंसर के इलाज में किया जाता है। नशे के लिए इसे कोकीन और हेरोइन में मिलाया जाता है।
इससे पहले डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने इसी साल 26 सितंबर को इंदौर में 110 करोड़ से ज्यादा कीमत की फेंटानिल जब्त की थी।
मैक्सिको के जार्ज सालिस के साथ केमिकल पर रिसर्च करने वाले डॉ. मोहम्मद सादिक और मनु गुप्ता नाम के तीन लोग पकड़े गए थे। तब डीआरआई के अधिकारियों ने पहली बार इस ड्रग की जब्ती का दावा किया था।
यह ड्रग नशे के लिए 0.001 ग्राम (एक मिलीग्राम) ली जाती है। ओवरडोज होते ही मौत हो सकती है। यानी इस ड्रग की 0.002 ग्राम (2 मिलीग्राम) मात्रा जान ले सकती है।
खतरे को देखते हुए डीआरआई ने रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) को भी कार्रवाई में शामिल किया था, क्योंकि
किसी भी संस्थान के पास इसका सैंपल लेने और इसकी जांच करने के संसाधन ही नहीं हैं। यह इतनी घातक है कि इसे बाहर भी नहीं भेजा जा सका।
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फेंटानिल को अमेरिका में सबसे खतरनाक ड्रग माना जाता है। अमेरिका में 2016 में इसके ओवरडोज से 20 हजार और 2017 में 29 हजार लोगों की जान गई थी।
यह मॉर्फीन से 100 गुना और अन्य किसी सामान्य ड्रग से 10 हजार गुना ज्यादा प्रभावी है। इसका इस्तेमाल कैंसर या मौत के कगार पर पहुंच चुके मरीजों का दर्द कम करने के लिए किया जाता है।
व्यावसायिक तौर पर (बेचने के लिए) किसी को लाइसेंस भी मिलता है तो वह केवल एक समय 0.1 ग्राम ही रख सकता है।

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