फिर सवालों के घेरे में मेरठ पुलिस
मेरठ में कस्बा किठौर अवैध असलहे बनाने का सालों से अड्डा बना हुआ है।
यहां के हथियार सप्लायरों के तार आईएसआईएस तक जुड़े हैं।
इनपुट के आधार पर एनआईए और एटीएस ने अभियान चलाकर यहां से कई संदिग्ध पकड़े थे।
इसके बावजूद पुलिस गंभीर नहीं है।
शुक्रवार को फिर किठौर में अवैध असलहा बनाने की फैक्टरी पकड़े जाने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
किठौर के शाहजहांपुर में अवैध असलहे बना रहे चार
आरोपियों को सर्विलांस टीम ने गिरफ्तार किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि
आखिर किठौर में अवैध हथियार बनाने वालों पर पुलिस शिकंजा क्यों नहीं कस पाई,
जबकि यहां के हथियार सप्लायरों का कनेक्शन आईएसआईएस से जुड़ा होना बताया गया था।
इसको लेकर एनआईए और एटीएस ने जनवरी 2017 में जांच की थी।
सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके से तीन संदिग्ध नईम, सुहेल और मतलूब की गिरफ्तारी भी की थी।
 अवैध असलहे में कई गांव बदनाम यह भी जानकारी मिली थी कि
किठौर में कई युवाओं को आईएसआईएस से जुड़े लोग ट्रेनिंग देते थे।
यहां ट्रेनिंग सेंटर भी खोला गया था।
संदिग्ध आतंकी मुफ्ती सुहेल ने किठौर आकर अवैध पिस्टल खरीदी थी।
सुरक्षा एजेंसियों ने जांच के बाद हथियार बनाने व सप्लाई करने वालों की धड़पकड़ की थी।
इसके बावजूद पुलिस ने अवैध असलहे बनाने वालों पर मजबूती से कार्रवाई नहीं की।
अवैध असलहे बनाने में किठौर के कई गांव बदनाम हैं।
किठौर, राधना, शाहजहांपुर समेत कई गांव के लोग हथियार बनाते और सप्लाई करते हैं।
इन लोगों पर कभी कभार पुलिस शिकंजा कसती है तो वह दूसरी जगहों पर फैक्टरी शिफ्ट कर लेते हैं।
मुंगेर से भी कारीगर बुलाकर अवैध असलहे बनवाए जाते हैं।
किठौर के अलावा सरूरपुर, सरधना, मवाना समेत कई जगहों पर हथियार बनाने की फैक्टरी का पुलिस भंडाफोड़ कर चुकी है।
धंधा चलता है पुलिस की सेटिंग से –
अवैध हथियार बनाने वालों की सेटिंग लोकल पुलिस से होती है।
कई बार दूसरे थाने की पुलिस या फिर क्राइम ब्रांच व सर्विलांस टीम छापा मारकर हथियारों की फैक्टरी पकड़ती है।
शुक्रवार को भी सर्विलांस टीम ने एक मुखबिर की सूचना पर शाहजहांपुर में छापा मारकर फैक्टरी पकड़ी।
जबकि किठौर थाना पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
इसको लेकर अलग अलग चर्चा भी चल रही है।
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फैक्टरी दो साल से चल रही थी-
लिस का दावा कि किठौर के शाहजहांपुर में करीब दो साल से अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी चल रही थी।
एनआईए और एटीएम की छापामारी के दौरान यह फैक्टरी बंद कर दी गई थी।
सुरक्षा एजेंसियों के हटने के बाद फिर से धंधा शुरू हो गया।
पुलिस बार बार आरोपियों को पकड़कर अवैध असलहे बनाने वालों की पोल खोलती है,
लेकिन असली गुनहगार तक नहीं पहुंच पाती।
पुलिस दावा कर रही है कि अबकी बार हथियार बनाने और सप्लाई करने वालों की गिरफ्तारी के प्रयास चल रहे हैं।

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