एक साल से ड्यूटी से लापता सेना के सिपाही के संबंध में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बुधवार को पुलिस और सेना के अधिकारियों से जानकारी मांगी है।
लापता सिपाही के पिता ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर मदद की गुहार लगाई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गांधी जयंती की छुट्टी होने के बावजूद बुधवार को मुख्य न्यायाधीश
गोविंद माथुर ने अदालत बुलाई और लापता सिपाही के पिता के पत्र को बंदीप्रत्यक्षी याचिका मानते हुए कमांड ऑफिसर मिलिट्री पुलिस कैंट बरेली से जानकारी तलब की।
मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए
अगली सुनवाई के लिए 14 अक्तूबर की तारीख दी है।
लापता सिपाही के पिता ने पत्र में लिखा है कि 28 पंजाब रेजिमेंट पिथौरागढ़ में तैनात सिपाही रजत सिंह को अवैध तरीके से रिटायर्ड कर्नल एके दुबे के बरेली आवास पर भेजा गया था।
28 जुलाई 2018 के बाद से उसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं हैं।वह लापता हैं।
लापता होने के एक साल बाद 30 जुलाई 2019 को बरेली के कैंट थाना में एफआईआर दर्ज की गई,
लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
शिकायत के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सैनिक के पिता ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अपने बेटे का पता लगाने की गुहार लगायी है।

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राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता सैयद अली मुर्तजा ने कोर्ट को बताया कि मिलिट्री पुलिस के कमांड ऑफिसर को लिखा गया कि
लांस नायक बलवंत सिंह को पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए भेजे,
लेकिन कोई सहयोग नहीं किया गया।
इसपर कोर्ट ने कमांड ऑफिसर मिलिट्री पुलिस कैंट को नोटिस जारी कर
मुख्यालय से लापता सिपाही के बारे में 14 अक्टूबर को जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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