सर्वोच्च न्यायालय द्वारा होमगार्डों का वेतन भत्ता बढ़ाए जाने के बाद भले ही होमगार्ड में खुशी की लहर दौड़ी थी,
लेकिन सरकार द्वारा होमागार्डों का बजट नहीं बढ़ाया गया है। बजट के अभाव में 300 होमगार्ड ड्यूटी से हटा दिए गए हैं। ऐसे में होमगार्डों में काफी आक्रोश है।
जिले में विभाग ने होमागार्डों की 32 प्रतिशत तक ड्यूटियां कम कर दी हैं।
प्रदेश सरकार ने होमगार्ड विभाग को निर्देश जारी किए हैं वर्ष भर के निर्धारित बजट में ही होमगार्डों के वेतन भत्ते देना सुनिश्चित करें।
जब सर्वोच्च न्यायालय ने होमागार्डों का वेतन भत्ता बढ़ा दिया है तो निश्चित ही बजट की मांग बढ़ गई,
लेकिन सरकार ने बजट नहीं दिया।
ऐसे में जिले के तीन सौ से अधिक होमगार्डों को विभाग ने ड्यूटी से हटा दिया और उनकी तैनाती कम कर दी है।
दीपावली पर्व से पहले होमगार्डों को ड्यूटी से हटाए जाने पर जिले के होमगार्डों में काफी आक्रोश है।
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होमगार्ड विभाग बजट के अभाव में 32 प्रतिशत तक ड्युटियां कम कर चुका है।
300 से अधिक होमगार्ड ड्यूटी से हटाए जाने के कारण शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है।
अधिकांश होमगार्ड शहर में यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए चौराहे पर तैनात किए गए थे।
अजय कुमार, जिला कमांडेंड, होमगार्ड का कहना है कि शासन से सीमित बजट मिला हुआ है। उसी बजट में होमगार्डों के वेतन भत्ते दिए जाने हैं।
इसलिए होमगार्डों की 32 प्रतिशत तक ड्युटियां कम की गई हैं।
महेश चंद्र जिलाध्यक्ष होमगार्ड एसोसिएशन का कहना है कि जिले के 300 से अधिक होमगार्ड ड्यूटी से हटा दिए गए हैं।
यह होमगार्डों और परिवार के साथ घोर अन्याय है। तत्काल होमगार्डों ड्यूटी पर लेना चाहिए।
आंकड़े की नजर से
– 875 होमगार्ड हैं जिले में।
– 4 करोड़ है जिले के होमगार्डों का सालाना बजट।
– 70 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन भत्तों पर होता है खर्ज।
– 675 रुपये प्रतिदिन हो गया है होमगार्डों का वेतन भत्ता।

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