मोहाली। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को मोहाली में देश की पहली फर्स्ट जेनरेशन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी।

50 एकड़ में पांच देशों के चालीस से अधिक प्रौद्योगिकी उद्यमियों और बिजनेस लीडर्स के सामूहिक दृष्टिकोण पर प्लाक्षा को बनाया जाएगा। 21 वीं सदी में दुनिया को बदलने के लिए प्रौद्योगिकी, विज्ञान और मानविकी के इंटरसेक्शन पर मौजूद अगली पीढ़ी के लिए एक आधुनिक यूनिवर्सिटी का निर्माण करना है।

इस मौके मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि भारत प्रौद्योगिकी क्रांति के शिखर पर है और ऐसी नई तकनीकों को विकसित करने की पहल करने की सख्त जरूरत है।

जो नई पीढ़ी के तकनीकी जानकारों का अच्छी तरह से विकसित करें, जिनके पास नॉलेज, स्किल और धैर्य हो। ताकि वे तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी में भारत को आगे रख सकें। उनकी मदद से ही भारत आगे चलकर एक नई सुपर पॉवर बनेगा।

प्लाक्षा के सह-संस्थापक और पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन, टेक महिंद्रा, विनीत नायर कहा कि जैसा कि प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और समाज पर अपना प्रभाव डालती है।

प्लाक्षा में, हमारा लक्ष्य भारत में 21 वीं सदी की प्रौद्योगिकी शिक्षा के लिए एक नई शुरुआत करना है जो कि एक संपूर्ण शिक्षा के लिए एक ऐसा बदलाव होगा जो कि शिक्षाशास्त्र, पाठ्यक्रम, फैकेल्टी, संस्कृति और सीखने की प्रक्रिया को पुन: निर्धारित करता है।

अमेरिकी आर्किटेक्चर, आरोन श्वार्ज द्वारा डिजाइन किए जा रहे एक अत्याधुनिक कैम्पस के साथ, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी का 50 एकड़ का परिसर अपने पहले ग्रेजुएट कार्यक्रम की शुरुआत के साथ 2021 में करेगा।

इस पूरी परियोजना में करीब 2000 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है जो कि अगले 15 सालों में किया जाएगा। पहले चरण  में एक हजार छात्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा और 2035 तक 8,000 छात्रों तक विस्तार किए जाने की योजना है।

संस्थापक समूह सदस्यों में भारत, अमेरिका, यूके, सिंगापुर और हांगकांग में कार्यरत बिजनेस लीडर्स शामिल हैं।

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