चुनाव आते ही मुद्दा बन जाता है अयोध्या लेकिन, विकास में कब आगे बढ़ेगा अयोध्या?

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अयोध्या। सालों से विकास की बाट जोह रही अयोध्या में अखिलेश कार्यकाल में विकास की योजनाएं तो शुरू हुई लेकिन अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ आगे निकले और अखिलेश सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटे हुए हैं।
जब चुनाव आते हैं, तब राजनीतिक दलों को अयोध्या याद आती है। देश की 543 सीटों पर कहीं न कहीं अयोध्या मुद्दे का असर चुनावों में दिखता ही है। इसके बावजूद अयोध्या विकास में अभी काफी पीछे है।
भजन संध्या, अंतर्राष्ट्रीय राम कथा म्यूजियम, राम की पैड़ी का जीर्णोद्धार, अंडरग्राउंड विद्युतीकरण, रानी हो के पार्क का विसतारिकरण जैसी योजनाएं अखिलेश सरकार के समय की है,
लेकिन यह सभी बस योजनाओं के रुप में ही रही हैं। योगी सरकार ने इनमें से ज्यादातर योजनाओं को रामायण सर्किट से जोड़ दिया है। जिसका काम अब धीरे-धीरे शुरू हो रहा है।
योगी ने सरकार में आते ही अयोध्या में अनवरत चलने वाली रामलीला की शुरुआत करवाई। शहर में लाइटिंग का काम भी शुरू किया। 2017 दीपोत्सव में योगी सरकार ने 133 करोड़ की योजनाओं की सौगात अयोध्या की दी थी, जबकि
2018 दीपोत्सव कार्यक्रम में 176 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास किया। अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार वी एन दास कहते हैं कि अखिलेश सरकार में जिन योजनाओं की घोषणा हुई थी, वह जमीन पर नहीं उतरी।
जबकि योगी सरकार में वह योजनाएं अब जमीन पर उतरती दिख रही हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अयोध्या का विकास हो रहा है। 2019 चुनाव के बाद भी अयोध्या का विकास की योजनाओं पर काम जारी रहेगा, तो ही माना जाएगा कि विकास के लिए यह सरकार तत्पर है।
अखिलेश सरकार और योगी सरकार का तुलनात्मक विवरण
अखिलेश सरकार के काम
योगी सरकार के काम
भजन स्थल के लिए 15 करोड़ की योजना शुरू हुई
अयोध्या में अनवरत रामलीला की शुरुआत
38 करोड़ की लागत से अयोध्या में सीवर निर्माण कार्य की योजना
अयोध्या में हर साल मनायी जाएगी भव्य दीपावली
52 करोड़ से अंडरग्राउंड विद्युतीकरण का कार्य जारी
श्री राम की 221 मीटर ऊँची प्रतिमा लगेगी
1 करोड़ की लागत से पर्यटकों की सुविधा हेतु आधुनिक शौंचालय का निर्माण
133 करोड़ की रामायण सर्किट की योजना केंद्र के सहयोग से योगी सरकार पूरा कराएगी।
राजघाट, तुलसी उद्यान को सुन्दरीकृत किया गया ।
चौदह कोसी, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पथ का सुंदरीकरण एवं उच्चीकरण का कार्य 15 करोड़ की लागत से कराया गया । परिक्रमा पथ के किनारे -किनारे नीम ,पाकड़, पारिजात आदि के छायादार वृक्षो को लगाया गया ।
राम की पैड़ी में अविरल जलबहाव तथा सुंदर लाइटिंग की व्यवस्था हेतु 14.50 करोड़ का धन निर्गत किया गया ।
अयोध्या से जनकपुरी तक बस सेवा और सड़क भी बनायीं जाएगी
सत्संग भवन, रैन बसेरा आदि का निर्माण कराया गया ।
सरयू तट का सौन्द्रिय्करण किया जायेगा
बाईपास से लेकर मोहबरा तक मार्ग का उच्चीकरण एवं चौड़ीकरण कराया गया
84 कोसी परिक्रमा मार्ग को हाईवे की तर्ज पर डेवलप किया जायेगा
टेढ़ी बाजार से अशर्फी भवन के आगे तक सड़क का नवीनीकरण
अयोध्या को हवाई मार्ग से जोड़ा जायेगा
संस्कृति विभाग द्वारा प्रेक्षागृह के निर्माण हेतु 5 करोड़ स्वीकृत
अयोध्या रेलवे स्टेशन को भव्य मंदिर के रूप में बनाया जायेगा केंद्र सरकार के सहयोग से
कोरिया की रानी की याद में बनने वाले 50 करोड़ की लागत के विशाल पार्क के निर्माण हेतु जमीन मुहैया कराने का काम किया गया।
रानी हो के पार्क का शिलान्यास दीपोत्सव 2018 के दौरान किया गया
रामायण थीम पार्क बनाने की घोषणा
नया घाट पर महिलाओं के लिए चेजिंग रूम
तुलसी वाटिका के पास फोटो स्टूडियो चला रहे प्रमोद कुमार शर्मा कहते हैं कि, अयोध्या एक धार्मिक नगरी है। अयोध्या में लगने वाले तीन मेले ही सबसे बड़ा रोजगार है। बाहर से लोग आते हैं,
ऐसे में सरकार को पर्यटन से सम्बंधित सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। कायदे से यहां भी अक्षरधाम और इस्कॉन जैसे मंदिर होने चाहिए।ताकि पर्यटकों की आमद बढ़ सके।
जिले के रीजनल टूरिस्ट ऑफिसर वीपी सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग का एक साकेत होटल है, जबकि सरयू तट पर एक यात्री गृह है।वहीं बातचीत में पता चला कि टूरिज्म विभाग से कोई गाइड की व्यवस्था भी नहीं है।
लोकल लड़के ही टूरिस्टों को अयोध्या दर्शन कराते हैं। जिनकी फीस भी फिक्स नहीं है। हालांकि रामायण सर्किट योजना के अंतर्गत टूरिज्म से सम्बंधित फैसिलिटी बढाने की योजना है।
रीजनल टूरिस्ट ऑफिसर वीपी सिंह ने बताया कि अयोध्या में हर साल टूरिस्ट बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में एक जनवरी से 31 दिसंबर तक 1 करोड़ 25 लाख टूरिस्ट आए थे।
जबकि 2017 में 1 करोड़ 41 लाख टूरिस्ट पहुंचे।वहीं, 2018 में 31 अक्टूबर तक एक करोड़ 45 लाख टूरिस्ट आ चुके हैं। दिसंबर तक यह आंकड़ा एक करोड़ डेढ़ लाख से ऊपर जाएगा।
जानकारी के मुताबिक अयोध्या में तकरीबन 5 हजार से ज्यादा मंदिर हैं। जिसमे मुख्य रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वर नाथ, जानकी घाट, लक्ष्मण किला, अशर्फी भवन, त्रिदंडी देव जैसे मंदिर शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों में तकरीबन 182 मंदिर जर्जर हालत में है। अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकार वीएन दास कहते हैं, जर्जर मंदिरों की संख्या लगभग 500 के ऊपर है। जिन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अफसर अपनी कुर्सी बचाने के लिए आंकड़ों में खेल करते हैं। उन्होंने बताया जब कोई हादसा होता है तो प्रशासन मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। 
सीएम योगी ने मार्च 2017 में यूपी की कमान संभाली थी। इसके बाद से उनके गृह नगर गोरखपुर के बाद सीएम योगी ने सबसे ज्यादा अयोध्या का दौरा किया है।
20 महीने के कार्यकाल में योगी 9 बार अयोध्या का दौरा कर चुके हैं। जबकि अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में यूपी की कमान संभालने के बाद एक बार भी अयोध्या नहीं पहुंचे। यह अलग बात है चुनाव प्रचार में वह आए थे।
अयोध्या में रामायण बेचने का काम करने वाले इंद्र प्रकाश का कहना है कि बाजारों में लाईट लग गयी है। गलियों तक में सड़क बन गयी है। योगी बार-बार अयोध्या आते हैं तो
अधिकारीयों में भी डर बना रहता है और वह तेजी से काम करते हैं।मेडिकल कॉलेज बन कर तैयार है, उसे शुरू करना है। नया अयोध्या स्टेशन का भूमि पूजन हो गया है।
वह भी बनना तैयार हो जाएगा। अयोध्या निवासी पंकज कहते हैं कि, पहले सरयू घाट गन्दगी से पटा रहता था, अब साफ-सफाई की व्यवस्था है। लोग घाट पर घुमने आते हैं। राम-हनुमान की मूर्ति लग गयी है।
अयोध्या के ही रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि, घोषणाएं तो काफी हुई हैं। हल्ला भी काफी मचाया जा रहा है, लेकिन अभी सभी योजनाएं जमीन पर नहीं उतरी है।
जब योजनाएं जमीन पर उतरने लगे तो माना जाए कि विकास हो रहा है। 2019 चुनाव बाद भी योगी सरकार का फोकस अयोध्या पर रहेगा, यह चुनाव बाद ही तय होगा।
जबकि वरिष्ठ पत्रकार समीरात्मज मिश्रा कहते हैं कि, अयोध्या बाजार का मुख्य मार्ग ही पिछले दीपोत्सव के बाद डेवलप दिखता है। लेकिन अभी भी मुहल्लों की सड़क बेकार है। नगर निगम की घोषणा हुई थी।
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वह खुद अभी एक जर्जर मकान में चल रहा है।उसका खुद का कोई ऑफिस नहीं है। बस स्टैंड नहीं है। सरयू तट पर गन्दगी दिख रही है। विकास तभी दिखता है, जब योगी का आगमन अयोध्या में होता है।

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