चीन
चीन का दबाव है कि पाकिस्तान उसकी रक्षा संबंधी परियोजनाओं में सहयोग दे। इसी के तहत लड़ाकू विमान बनाने की परियोजना में पाकिस्तान को शामिल किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार चीन पाकिस्तान को अपने विश्वसनीय सहयोगी के रूप में देखता है। वह सहयोग के लंबे इतिहास को देखते हुए पड़ोसी पाकिस्तान का फायदा उठाना चाहता है।
चीन अपनी वन बेल्ट- वन रोड (ओबीओआर) परियोजना का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए कर रहा है। इसके तहत उसकी पाकिस्तान में लड़ाकू विमान और हथियार बनाने की योजना है।
यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दी गई है। हालांकि चीन ने इस रिपोर्ट के तथ्यों को खारिज किया है।
चीन ऐसा हथियारों के बढ़ते बाजार और सीमांत इलाके में प्राकृतिक संसाधनों के प्रचुरता के चलते करना चाहता है। भारत के साथ पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता के चलते चीन पाकिस्तान को बढ़ावा देकर उसे रोकना चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान को सैन्य सहायता रोके जाने के कुछ हफ्तों बाद चीन और पाकिस्तान के सैन्य अफसरों ने लड़ाकू विमान व अन्य हथियार बनाने की रूपरेखा तैयार की।
ये सब चीन के बुनियादी सुविधाओं के विस्तार वाली वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट की आड़ में होगा। इस प्रोजेक्ट के जरिये चीन की 70 देशों को जोड़ने की योजना है।
चीन अक्सर कहता है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से आर्थिक विकास की परियोजना है लेकिन पाकिस्तान के साथ हथियार बनाने की योजना ने उसके उद्देश्यों से पर्दा उठा दिया है।
रिपोर्ट में ग्वादर बंदरगाह के नौसैनिक इस्तेमाल की ओर से भी इशारा किया गया है। कहा गया है कि भारत और अमेरिका के साथ तनाव पैदा होने की स्थिति में चीन इस बंदरगाह का सैन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
ओबीओआर प्रोजेक्ट के जरिये ही चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को विकसित किया है और उसका नियंत्रण चीन के पास ही है।
अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान अंतरिक्ष में भी सहयोग बढ़ाने की योजना पर कार्य कर रहे हैं।
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हाल में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अंतरिक्ष के सैन्यीकरण की कोशिश कर रहा है।

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