रिलायंस कम्‍युनिकेशंस
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम द्वारा स्पेक्ट्रम डील को मंजूरी ना दिए जाने के पीछे मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस जियो द्वारा विभाग को शुक्रवार को लिखे गए एक पत्र की भूमिका अहम मानी जा रही है। खबर के अनुसार, इस पत्र में रिलायंस जियो ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि
वह रिलायंस कम्यूनिकेशंस की स्पेक्ट्रम से संबंधित किसी भी पिछले बकाए को देने के लिए जिम्मेदार नहीं होगी। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के अधिकारियों के मुताबिक, ये शर्त सरकार की स्पेक्ट्रम संबंधी ट्रेडिंग नियमों के अनुरुप नहीं है। स्पेक्ट्रम डील के सरकारी नियमों के अनुसार, “स्पेक्ट्रम का खरीददार ही विक्रेता की देनदारियों के लिए जिम्मेदार होता है।”
अब चूंकि रिलायंस जियो ने रिलायंस कम्यूनिकेशंस की पिछली देनदारियों की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया है। यही वजह है कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने इस सौदे को मंजूरी देने से भी मना कर दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम के अधिकारियों का कहना है कि ‘अब गेंद दोनों कंपनियों के पाले में हैं। अब वो फैसला लेकर हमारे पास आए, तब तक यह डील अटकी रहेगी।’
भारी कर्ज में फंसी अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशंस को बड़ा झटका लगा है। दरअसल भारत सरकार के टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने रिलायंस कम्यूनिकेशंस और रिलायंस जियो इंफोकॉम के बीच होने वाली बहुप्रतिक्षित स्पेक्ट्रम डील को मंजूरी देने से इंकार कर दिया है।
बता दें कि इस स्पेक्ट्रम डील से रिलायंस कम्यूनिकेशंस को 18000 करोड़ रुपए मिलने थे। 46000 करोड़ के कर्ज में दबी रिलायंस कम्यूनिकेशंस को रिलायंस जियो इंफोकॉम के साथ होने वाली इस डील से बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन अब डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (DoT) ने इस सौदे को ‘नियमों के अनुरुप ना होने’ के चलते मंजूरी देने से इंकार कर दिया है।
दोनों कंपनियों के बीच होने वाली डील के तहत रिलायंस कम्यूनिकेशंस 18000 करोड़ रुपए में अपनी वायरलैस स्पैक्ट्रम, टॉवर, फाइबर और एमसीएन को रिलायंस जियो इंफोकॉम को बेचने वाली है। इस डील में रिलायंस जियो को 122.4 MHz के 4जी स्पेक्ट्रम, 43000 टेलीकॉम टॉवर, 178000 किलोमीटर में फैला फाइबर नेटवर्क और 248 मीडिया कन्वर्जेंस नोड्स मिलने वाले हैं।
लेकिन अब यह डील लटक गई है। जिसके चलते रिलायंस कम्यूनिकेशंस द्वारा एरिक्सन कंपनी के बकाए 550 करोड़ रुपए लौटाने का वादा खटाई में पड़ सकता है। बकाया ना लौटाने पर रिलायंस कम्यूनिकेशंस के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरु हो सकती है।
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साथ ही तय समय सीमा पर पैसा ना लौटाने के चलते अनिल अंबानी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है। रिलायंस इंफ्राटेल पर भी अपने शेयरहोल्डर्स को 232 करोड़ रुपए लौटाने का दबाव है।

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