पूर्व प्रधानमंत्री
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह कभी प्रेस से डरने वाले प्रधानमंत्री नहीं रहे। मंगलवार को यह बात अपनी किताब चेंजिंग इंडिया के विमोचन के दौरान कही।
नरेंद्र मोदी अपनी कई सभाओं में मनमोहन सिंह के चुप रहने पर सवाल उठा चुके हैं। सिंह ने यह भी कहा कि भारत में दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की ताकत है।
मनमोहन ने कहा, “प्रेस से बात करते हुए मुझे कभी भी डर महसूस नहीं हुआ। मैं प्रेस से नियमित रूप से मिलता था। विदेश दौरों पर भी रिपोर्टर्स साथ होते थे।
वहां से वापस लौटने पर बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस होती थी।” 5 हिस्सों में प्रकाशित ‘चेंजिंग इंडिया’ में मनमोहन सिंह ने 10 साल प्रधानमंत्री रहने के दौरान के किए गए कामों और एक अर्थशास्त्री के रूप में अर्थव्यवस्था का आकलन किया है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा- “लोग कहते हैं कि मैं खामोश प्रधानमंत्री था लेकिन मेरी किताब के पांचों भाग में सारी बात लिखी हुई है।
वे लोग प्रधानमंत्री रहने के दौरान मेरी उपलब्धियों को नहीं बताना चाहते। लेकिन मेरी किताब इस बात को बेहतर तरीके से बताएगी।”
राहुल गांधी भी नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा चुके हैं कि 2014 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। मनमोहन ने कहा कि भारत में आर्थिक रूप से दुनिया की बड़ी ताकत बनने की क्षमता है।
मनमोहन ने सरकार और आरबीआई के रिश्ते को पति-पत्नी जैसा बताया। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते में उतार-चढ़ाव आएंगे, मतभेद भी होंगे, लेकिन इनका समाधान ऐसे निकालना चाहिए कि दोनों संस्थान सौहार्द्रपूर्ण माहौल में साथ काम करते रहें।
पूर्व प्रधानमंत्री के मुताबिक- आरबीआई की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की रक्षा करना जरूरी है। हमें एक मजबूत आरबीआई चाहिए। यह ऐसा आरबीआई होना चाहिए जो
सरकार के साथ मिलकर काम करे। मनमोहन ने आशा जताई कि सरकार और आरबीआई एक साथ काम करने का कोई न कोई सही रास्ता निकाल लेंगे।
दरअसल, सरकार के साथ विवाद के चलते उर्जित पटेल ने कार्यकाल पूरा होने से 8 महीने पहले ही आरबीआई गवर्नर का पद छोड़ दिया था।
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कैपिटल रिजर्व और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को कर्ज के नियमों में ढील सहित कई मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच लगातार तनाव चल रहा है।

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