अमित शाह
भाजपा में अमित शाह को चुनावी महारथी माना जाता है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव 2014 से ऐन पहले उन्हें भाजपा महासचिव बनाया गया था। 2014 के आम चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ हुई भाजपा की जीत के बाद 9 जुलाई, 2014 को उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
उसके बाद पार्टी ने उस साल हुए सभी विधान सभा चुनावों में जीत दर्ज की। इसके अगले साल बिहार और दिल्ली ने भाजपा के विजय रथ को रोक दिया। 2016 में भी पांच राज्यों में चुनाव हुए मगर सिर्फ एक राज्य में ही जीत सकी।
हालांकि, 2017 भाजपा के लिए अच्छा रहा। तमाम झंझावतों के बावजूद भाजपा ने न केवल गुजरात फतह किया बल्कि सात में से छह राज्यों में जीत दर्जकर सरकार बनाई लेकिन 2018 के अंत आते-आते भाजपा का दम फूलने लगा।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भाजपा को बेचैन कर दिया है। तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान) से न केवल उसकी विदाई तय है बल्कि कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देख रही भाजपा के लिए यह बड़ा झटका है।
यह पहला चुनाव है, जब भाजपा चारों खाने चित हुई है। इससे पहले किसी भी विधान सभा चुनाव में भाजपा की ऐसी हार नहीं हुई थी, वह कम से कम चार में से एक पर जीतती रही थी। मौजूदा पांच राज्यों के चुनाव को छोड़ दें तो 2014 से 2018 के बीच देश के कुल 22 राज्यों में विधान सभा चुनाव हुए हैं।
इनमें से कुल 14 राज्यों में भाजपा की सरकार बनी है। इनमें से कुछ राज्यों में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रणनीति की वजह से सरकारें बनी हैं लेकिन हालिया चुनावों में भाजपा और अमित शाह का रिपोर्ट कार्ड खराब हुआ है। साथ ही जीत का ट्रेंड भी बदला है।
लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में विधान सभा चुनाव हुए। इन चुनावों में भाजपा अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह ने नेतृत्व किया और सभी राज्यों में भाजपा की जीत हुई। जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने नई राजनीतिक कहानी लिखते हुए पीडीपी के साथ पहली बार सरकार बनाई, जो इस साल के मध्य तक चली।
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2015 में बिहार और दिल्ली में विधान सभा चुनाव हुए लेकिन दोनों ही राज्यों में भाजपा की दाल नहीं गली। दिल्ली में जहां अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप ने 70 में से 67 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की वहीं बिहार में एनडीए के सहयोगी रहे नीतीश कुमार ने लालू यादव की राजद के साथ चुनाव लड़ा था।
उनके गठबंधन की जीत हुई, लेकिन जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने पलटी मारते हुए राजद से गठबंधन तोड़ दिया और भाजपा से हाथ मिला लिया। फिलहाल वहीं जेडीयू-भाजपा की गठबंधन सरकार है।

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