हैकर्स
सेक्टर-12 में रहने वाले मोहन लाल ने बताया कि एसबीआई स्थित उनके बैंक खाते से पिछले दो महीने में यूपीआई ऐप के माध्यम से रुपए निकाले गए। उन्होंने बताया, ‘‘मैं 4 दिसंबर को एटीएम से कुछ पैसे निकालने गया था, जिसके बाद फ्रॉड होने की जानकारी मिली।
इसके बाद मैं सेक्टर-2 स्थित अपनी बैंक शाखा में गया तो पता चला कि 29 सितंबर से सात बार मेरे खाते से रुपए ट्रांसफर किए गए।’’ पीड़ित ने मामले की शिकायत सेक्टर-20 पुलिस थाने में दर्ज कराई है, जिसे साइबर सेल भेजा दिया गया। साइबर सेल के एक अधिकारी का कहना है कि हैकर्स इस तरह की घटना को आसानी से अंजाम दे सकते हैं।
नोएडा सेक्टर-12 में रहने वाले एक ऐसे व्यक्ति के बैंक खाते से यूपीआई ऐप के जरिए 6.8 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसके पास स्मार्टफोन तक नहीं था। अभी तक साइबर फ्रॉड के अधिकतर मामले बैंक या दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर डिटेल लेने के बाद सामने आए हैं।
साइबर सेल के मुताबिक, हैकर्स नकली सिम बनाकर इस तरह की धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं। इसके बाद वे असली सिम को ब्लॉक कर देते हैं। नई सिम की मदद से वे यूपीआई ऐप (UPI App) डाउनलोड करते हैं और बैंक डिटेल भरने के बाद पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।
यूपीआई को किसी भी मोबाइल पर #99 टाइप करके एक्टिवेट किया जा सकता है। इसके लिए हैकर्स को सिर्फ डुप्लीकेट सिम की जरूरत होती है। इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड के ओटीपी, यूपीआई आईडी और पिन आदि डेटा किसी के साथ भी शेयर न करें।
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जानकारी के मुताबिक, पुणे के एक व्यक्ति के पास एयरटेल से कॉल आई थी, जो फेक कॉल थी। कॉलर ने पीड़ित से कहा कि अगर वे अपनी सिम की डिटेल शेयर नहीं करेंगे तो वह ब्लॉक हो जाएगी। पीड़ित ने पूरी जानकारी दे दी, जिसके बाद उनके खाते से पैसे निकल गए।

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