भीड़ से
महुआ और चिंग्रावती गांव उस घटना स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हैं जहां स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) की सोमवार के दिन भीड़ ने हत्या कर दी। विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार सुबह दोनों गांव के ग्रामीण स्याना पुलिस स्टेशन पहुंचे और खेतों में कथित तौर गाय का शव होने की जानकारी दी।
करीब 50 से 60 लोगों की संख्या में पहुंचे ग्रामीण ने शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए ट्रॉली में लाए शव को चिंग्रावती पुलिस बूथ के बाहर रख बुलंदशहर जाने वाले हाईवे को ब्लॉक कर दिया।
बुलंदशहर के सियाना शहर में चिंग्रावती पुलिस बूथ से केवल 500 मीटर की दूरी एक टाटा सूमो, शीशे के टुकड़े और चकनाचूर हो चुके हेलमेट पड़े हैं। जिले के मुख्य शहर और पुलिस बूथ को जोड़ने वाली मुख्य सड़क, जो यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर रहे हैं, के बीच पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ट्रक से भरी पड़ी है।
इस दौरान स्याना स्टेशन इंचार्ज सुबोध कुमार सिंह सुबह दस से ग्यारह बजे के बीच घटनास्थल पर पहुंचे। उनके साथ सिर्फ तीन सहकर्मी थे, जिनमें ड्राइवर भी शामिल है। यहां पुलिसकर्मियों ने उत्तेजित भीड़ से गुजारिश की कि वो यातायात को सुचारु रूप से चलने दे। भीड़ को भरोसा दिया गया कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी और तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
बुलंदशहर के जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा ने बताया, ‘यह उन लोगों से अनिवार्य रूप से रास्ता क्लियर करने का अनुरोध था। पुलिस अधिकारी क्राइम सेल का जवाब देकर प्रोटोकॉल बनाए रख रहा था। जैसे ही लोगों से वापस जाने को कहा बातचीत बहस में बदल गई। लोग नियंत्रण से बाहर हो गए। भीड़ में कुछ लोगों ने पत्थरबाजी कर दी।’ एक पुलिसकर्मी के मुताबिक एसएचओ और उनकी साथियों को उग्र भीड़ ने घेर लिया था। लोगों को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की गई।
शुरुआती जांच के मुताबिक, पुलिस ने भीड़ से बचने के लिए कार खेतों में उतार दी। सुबोध गाड़ी में थे और जख्मी थे। बाद में पुष्टि हो गई सुबोध का घाव गोली लगने की वजह से था। इसके अलावा पत्थरबाजी में अन्य कर्मी भी जख्मी हुए। राम आसरे जो उस वक्त पुलिस वाहन चला रहे थे,
बताया, हमें अपनी जिंदगी बचाने के लिए भागना पड़ा क्योंकि पत्थरबाज हमारे पीछे आ रहे थे। हमने सुबोध सर का शव ले जाने की कोशिश की लेकिन बढ़ती अशांति के कारण अपना इरादा बदलना पड़ा। हालांकि पुलिस प्रशासन ने इस बात से साफ इनकार किया है कि पुलिस बल में कमी के कारण सुबोध की मौत हुई।
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जिला मजिस्ट्रेट के मुताबिक, ‘यह सच के पुलिस फोर्स का एक बड़ा हिस्सा इज्तिमा में तैनात किया गया, एक तरह का मुस्लिम जोड़ जो करीब 45-50 किलोमीटर की दूरी पर है। मगर हिंसा की खबर मिलते ही फोर्स तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।’ मामले में एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि सीसीटीवी के जरिए लोगों की पहचान की जा रही है। मामले में कार्रवाई की जाएगी।

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