विधायक ब्रजभूषण
महोबा। उन्होंने पांच साल के दिव्यांग अरुण अहिरवार को एक दिन के लिए अपनी गाड़ी, गनर व सचिव सौंप दिए। इतना ही नहीं उसे अपनी जगह जन चौपाल पर बैठा दिया।

 

नन्हा अरुण विधायक की तरह जनसमस्याओं की अर्जी लेता रहा। उसने इशारों में कोतवाल को भी निर्देश दिए। अरुण का परिवार खुशी के मारे फूला नहीं समा रहा है।
अपने विवादित बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाले चरखारी विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने एक फिल्मी काम किया।
दरोगा ने गोद में लेकर कुर्सी पर बैठाया 
विधायक ब्रजभूषण का तामझाम लेकर नन्हें अरुण कोतवाली पहुंचे। यहां तैनात दरोगा ने उन्हें गोद में उठाकर कुर्सी पर बैठाया। कोतवाली में अरुण की खूब आवभगत हुई।

अरुण को शिकायत निस्तारण रजिस्टर भी दिखाया गया। चरखारी विधानसभा के जैतपुर कस्बे से पहुंचे फरियादियों की खासी भीड़ रही। लोगों ने नन्हें बालक के साथ खूब सेल्फी ली।
माता-पिता की आंखें हुईं नम
अपने दिव्यांग बेटे को इस तरह सम्मान मिलने से पिता तुलसीराम की आंखें नम हो गईं। बताया कि उसका पुत्र जन्म से नहीं बोल पाता है। लेकिन, आज चरखारी के विधायक ब्रजभूषण राजपूत ने बेटे को जो सम्मान दिया है, उसे वह जीवन भर नहीं भुला पाएंगे।
हज यात्रा पर बयान देकर चर्चाओं में आए थे राजपूत
भाजपा के विधायक ब्रजभूषण राजपूत को चर्चाओं में रहने का शौक है। विधायक बनने के बाद पहली बार चर्चाओं में तब आए थे जब उन्होंने हज यात्रा को लेकर विवादित बयान दिया था।

ब्रजभूषण ने कहा था कि अगर राम मंदिर नहीं बना तो हज यात्रा पर रोक लगा दी जाएगी। हालांकि, भाजपा ने उनके इस बयान से पल्ला झाड़ लिया था।
अपनी कनपटी पर रिवाल्वर रखकर चर्चाआें में आए थे विधायक के पिता
ब्रजभूषण राजपूत के पिता गंगाचरण राजपूत लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। वह भाजपा, कांग्रेस, बसपा और सपा के नेता रह चुके हैं।
बुंदेलखंड के दिग्गज नेताओं में शामिल गंगाचरण राजपूत 2004 में तब चर्चाओं में आए थे जब उन्होंने 10 जनपथ के बाहर अपनी कनपटी पर रिवाल्वर रख ली थी और
ऐलान किया था कि अगर सोनिया गांधी प्रधानमंत्री नहीं बनीं तो वह आत्महत्या कर लेंगे।

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