बिहार शेल्टर
नई दिल्ली। अदालत ने बिहार सरकार से पूछा- क्या आप यौन उत्पीड़न के सभी मामलों की जांच की जिम्मेदारी ले सकते हैं? इस पर सरकार ने वक्त मांगा।
कोर्ट ने इससे इनकार करते हुए शेल्टर होम से जुड़े सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी। अब तक इन मामलों की जांच बिहार पुलिस कर रही थी। बिहार पुलिस ने 17 में से 10 शेल्टर होम के खिलाफ केस दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने बुधवार को कहा- हम स्टेटस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं।
बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सुनवाई के दौरान मुजफ्फरपुर केस की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की जांच कर रहे सीबीआई अफसर का तबादला न किया जाए।
इस दौरान बिहार सरकार के वकील ने कहा कि अगर सभी मामलों को सीबीआई को ट्रांसफर किया जाता है तो इससे गलत संदेश जाएगा। पुलिस की पड़ताल का महत्व भी खत्म हो जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस मामले की जांच करने में असफल रहती है तो जांच सीबीआई को ट्रांसफर करना पड़ेगा।
टीस की रिपोर्ट में हुआ था खुलासा
यह मामला मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में 34 लड़कियों से दुष्कर्म होने से जुड़ा है। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस की बिहार के समाज कल्याण विभाग को भेजी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में लड़कियों से ज्यादती होने का खुलासा हुआ था।
यह शेल्टर होम बृजेश ठाकुर चलाता था, जो पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू के पति चंद्रशेखर का दोस्त है। 31 मई को ठाकुर समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले के खुलासे के बाद मंजू ने बिहार की कैबिनेट से इस्तीफा दिया था।
आर्म्स एक्ट में हुई मंजू की गिरफ्तारी
मंजू के पति के घर सीबीआई के छापे के दौरान 50 कारतूस मिले थे। इसके बाद मंजू और उनके पति चंद्रशेखर पर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंजू की गिरफ्तारी नहीं होने पर बिहार पुलिस को फटकार लगाई थी। बाद में 20 नवंबर को मंजू ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।

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