टूट रही
नेशनल जियोग्राफिक के मुताबिक हजारों किलोमीटर लंबी इस दीवार के 30 फीसदी हिस्से भारी बारिश की वजह से टूट गए हैं। इस प्राचीन दीवार के टूटे हुए हिस्सों तक पहुंचने और दीवार को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए चीन ड्रोन की मदद ले रहा है। इस ड्रोन के जरिए चीन अथॉरिटी ने दीवार के टूटे हुए हिस्से का नक्शा बनाया है।
ड्रोन के जरिए दीवार के टूटे हुए हिस्सा का डाटा इकठ्ठा किया गया है।  दीवार को बचाने में जुटे मजदूर इस डाटा के जरिए ही इसके अहम बनावट के बारे में जरूरी जानकारियां इकठ्ठा कर पा रहे हैं। मई में साउथ चीन मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि Intel’s Falcon 8+ ड्रोन का इस्तेमाल इस ऊंची दीवार की तस्वीरे लेने में किया जा रहा है।
आर्किटेक झाओ पेंग ने बीबीसी से बातचीत करते हुए बताया है कि इस दीवार को बचाने के लिए नई पत्थरों और कंक्रीट का इस्तेमाल किया जा रहा है जो काफी मुश्किल काम है। इस दीवार के कुछ हिस्से काफी खतरनाक हैं। ड्रोन के जरिए ऐसे हिस्सों की लंबाई और उसकी स्थिति के बारे में सूचनाएं इकठ्ठा करने में सुवधिा हो रही है। उन्होंने कहा है कि सही में यह एक बेहतरीन निर्माण है।
टूट हुए हिस्से के पुननिर्माण के लिए इसके बनावट, दीवार में हुई छोटी से छोटी छेद, इसकी आकृति इत्यादि के बारे में गहन अध्ययन बेहद जरूरी है। कई जगहों पर यह दीवार उस स्थिति में पहुंच गई है, जहां से कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। दीवार ठीक करने के लिए पत्थर और अन्य जरूरी सामान खच्चरों के जरिए वहां तक पहुंचाए जा रहे हैं। कई मजदूर दीवार को ठीक करने के काम में जुटे हुए हैं।
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आपको बता दें कि इस दीवार का निर्माण सन् 1368-1644 के बीच किया गया था। हेबई प्रांत में यह दीवार स्थित है। ‘द ग्रेट वॉल ऑफ चीन’ कोरियन बॉर्डर से लेकर गोबी डेजर्ट तक फैला हुआ है। कुछ ही समय पहले चीन की इस विश्व प्रसिद्ध दीवार का हिस्सा भारी बारिश में ढह गया था। शांशी प्रांत के दाई काउंटी में यानमेन के पास यह ऐतिहासिक दीवार गिर गई थी।

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