अमेरिकी राज्‍य
ब्राजील,दीमकों द्वारा बनाए गई ये टीलेनुमा आकृतियां 8 फीट लंबी और 30 फीट तक चौड़ी हैं। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ये टीले बने हुए हैं। कुछ टीले तो 60 फीट तक चौड़े हैं। दीमकों के इन टीलों की खोज ब्रिटेन यूनिवर्सिटी ऑफ सलफोर्ड के कीटविज्ञानी जे.मार्टिन ने की है।
गूगल अर्थ मैप से देखने पता चलता है कि जितने क्षेत्रफल में दीमकों के ये टीले बने हुए हैं, वह गीजा के 4000 पिरामिडो के बराबर और इनकी संख्या तकरीबन 200 मिलियन के करीब है।
दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल ब्राजील के उत्तरी पश्चिमी इलाके के जंगलों में दीमकों जमीन पर करोड़ो टीलेनुमा लैंडस्लाइड बना दी हैं।
ये लैंडस्लाइड करीब 88 हजार स्कवायर माइल्स क्षेत्रफल में फैले है। बता दें कि यह श्रेत्रफल अमेरिकी राज्य मिनेसोटा के बराबर है।
जे.मार्टिन और उनके एक साथी ने सोमवार को जर्नल करेंट बायोलॉजी में छपी अपनी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। जे.मार्टिन और उनके साथी विज्ञानी ने दीमकों के 11 टीलों से सैंपल इकट्ठा किए हैं, जिसमें रेडिएशन और मिनरल्स का पता लगाया जा रहा है।
जांच में पता चला है कि जांच किए गए टीलों में से सबसे पुराना टीला 3800 साल पुराना है। दीमकों के टीलों के बारे में पता लगाने वाले वैज्ञानिक जे. मार्टिन का कहना है कि यदि इस जगह से पेड़ों का कवर हटा दिया जाए तो यह जगह धरती के आश्चर्यों में जगह बना सकती है।
जे.मार्टिन का कहना है कि पहली बार में इनका पता लगाना मुश्किल है। वह भी एक बार में इन्हें पहचान नहीं पाए थे, क्योंकि यह इलाका पेड़ों से घिरा हुआ है। जे.मार्टिन ने बताया कि वह मधुमक्खियों की खोज में ब्राजील के सूखे जंगलों में आए थे।
एक मील के करीब चलने के बाद ही उन्हें ये टीलेनुमा आकृतियां दिखाई दीं। स्थानीय लोगों ने मार्टिन को बताया कि ये दीमकों के टीले हैं। बता दें कि इन दीमकों के टीलों पर रिसर्च करते हुए ही जे.मार्टिन की मुलाकात एक अन्य बायोलॉजिस्ट रॉय फंच से हुई।
फंच ने मार्टिन को बताया कि साल 1970 में उन्हें इन टीलो के बारे में जानकारी हुई थी। फंच ने बताया कि उस वक्त के टीलो में जो सबसे बड़ा टीला था, वह 15 फीट तक ऊंचा था।
1980 में रॉय फंच ने उस वक्त की मशहूर विज्ञान पत्रिका में भी इन दीमक के टीलो के बारे में लिखा था।
फंच का कहना है कि इस जगह जमीन के नीचे क्या हो रहा है, उसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इलाका लंबे समय से सूखाग्रस्त है और
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बारिश वगैरह ना होने के चलते यहां दीमकों का साम्राज्य स्थापित हो गया है।

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