देशद्रोह के
गुजरात। हार्दिक के अलावा उनके दो साथी, दिनेश बांभनिया और चिराग पटेल के नाम भी इस केस में हैं। कोर्ट ने इस मामले में धारा 124 (ए) (देशद्रोह) और 120(बी) (आपराधिक षडयंत्र) के तहत आरोप तय किए हैं। इन तीनों के खिलाफ अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 18 पेज की चार्जशीट दाखिल की है।
इन तीनों पर पटेल समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए हिंसा भड़काने का भी आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने अभी इन तीनों को दोषी नहीं माना है और ये सभी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
अहमदाबाद के सत्र न्यायालय ने आज (20 नवंबर, 2018) को पाटीदार और पिछड़े वर्ग के नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ देशद्रोह के मामले में आरोप तय कर दिए। ये आरोप साल 2015 के एक मामले में तय किए गए हैं।
हार्दिक ने कोर्ट से बाहर निकलकर मीडिया से बात की। हार्दिक ने कहा, ”देशद्रोह के आरोप, सरकार के खिलाफ जंग छेड़ने के आरोप, ये आरोप मुझसे नाराज लोगों ने मेरे ऊपर लगाए हैं।
जैसे में हथियारों के साथ बीजेपी के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए बाहर निकला हुआ था। लेकिन न्यायपालिका में मेरा यकीन है। मैं लड़ूंगा और जरूरत पड़ेगी तो ऊपर कोर्ट में भी जाऊंगा।”
हार्दिक ने आरोप लगाया कि उनका अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में कोई यकीन नहीं है, जिनकी चार्जशीट के आधार पर मेरे खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। हार्दिक ने सवाल किया,
”उनके क्राइम ब्रांच के मुखिया जेके भट्ट भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इससे पहले अभय चूड़ास्मा और डीजी बंजारा पर भी आरोप लग चुके हैं। तो कोई कैसे ऐसी क्राइम ब्रांच पर अपना यकीन रखे।”
उन्होंने ये भी कहा,” क्राइम ब्रांच कहती है कि मैं पाटीदारों के आरक्षण के लिए जिस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा हूं। वह संभव नहीं है। ये क्यों संभव नहीं है? क्राइम ब्रांच को लोगों को भ्रमित नहीं करना चाहिए।”
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बता दें कि हार्दिक पटेल एक पोंजी स्कीम घोटाले में दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोपों का सामना कर रहे जेके भट्ट और सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर केस में चूड़ास्मा और बंजारा के खिलाफ लगे आरोपों का जिक्र कर रहे थे।

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