केसरी की
सीताराम केसरी दलित नहीं, बल्कि ओबीसी (बनिया) थे। पीएम ने उन्हें दलित बताया। क्या देश को ऐसा अशिक्षित प्रधानमंत्री चाहिए?” इस ट्वीट के तीन दिन पहले उन्होंने एक और ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा था।
कहा था, “मोदी हमारे लोकतांत्रिक देश में सभी संस्था के युद्ध क्यों कर रहे हैं? किसी भी तरीके से वो जो चाह रहे हैं, हासिल कर ले रहे हैं, लेकिन ये महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण ये है कि इससे हमारी देश की सियासत को नुकसान पहुंच रहा है।”
पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने सोमवार (19 नवंबर) को ट्वीट कर पीएम मोदी के उपर निशाना साधते हुए कहा कि मैं भी सीताराम केसरी की तरह दलित हूं। फिर मोदी मेरे उपर अन्याय क्यों कर रहे हैं? इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया और कहा कि, “जो लोग मेरे तंज को अभी तक नहीं समझे हैं, मैं उन्हें अब पूरी बात बता देता हूं।
दरअसल, यशवंत सिन्हा ने यह तंज पीएम मोदी के उस बयान पर किया है, जिसमें उन्होंने सीताराम केसरी को दलित बताया था। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “सोनिया गांधी को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाने के लिए दलित समाज के सीताराम केसरी को उठाकर बाहर फेंक दिया था।
देश को पता है कि सीताराम केसरी, दलित, पीडि़त और शोषित समाज से आए हुए व्यक्ति को कैसे जबरन हटाया गया था? कैसे बाथरूम में बंद कर दिया गया था? कैसे दरवाजे से निकालकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया था।
इसके बाद मैडम सोनिया जी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। प्रधानमंत्री की बात छोड़ों, कांग्रेस गांधी-नेहरू परिवार से बाहर के एक व्यक्ति को पांच साल तक कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर देखे।”
कांग्रेस ने भी पीएम मोदी की इस गलती पर निशाना साधा था। कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा था, “पीएम फिर से गलत हैं। केसरी जी दलित नहीं, बल्कि वैश्य समुदाय से आते थे।
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केसरी जी ने स्वंय कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। मैं उस समय उनका राजनीतिक सलाहकार था। मैं पूरी बातों से अवगत हूं।”

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