भारत सरकार
फेसबुक किसी देश के कानून और वहां की सेवा शर्तो के मुताबिक सरकार के आवेदन का जबाव देता है। मगर सूत्रों का कहना है कि ये लॉ इन्फोर्समेंट के लिए उपयोग किए गए डेटा से संबंधित है। फेसबुक ने 2013 से जुलाई, 2018 की जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान सरकार द्वारा डेटा की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
भारत सरकार द्वारा फेसबुक से डेटा (जानकारियां) की मांग हर साल लगातार बढ़ती जा रही है। साल 2015 के बाद से इस मांग में करीब 63 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को रिलीज की एक रिपोर्ट में फेसबुक ने खुद इस बात की जानकारी दी है। हालांकि फेसबुक ने यह नहीं बताया कि भारत सरकार ने फेसबुक यूजर्स की किस तरह की जानकरी मांगी है।
पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी से जून के बीच 68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 के शुरुआती छह महीनों में सरकार ने फेसबुक से सिर्फ आठ बार जानकारियां मांगी जबकि साल 2018 के शुरुआती महीनों में यह बढ़कर रिकॉर्ड 16,580 पहुंच गई।
इसके अलावा साल 2013 के शुरुआती छह महीनों में सरकार ने 4,144 फेसबुक यूजर्स के एकाउंट का एक्सेस मांगा था जबकि यह 2018 के शुरुआती छह महीनों में बढ़कर 23,047 तक पहुंच गया। फेसबुक अकाउंट्स की जानकारी मांगने के मामले में भारत अब यूएस के बाद दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने फेसबुक से धार्मिक, हेट स्पीट, विरोधी राज्य मानहानि से जुड़े कंटेंट हटाने की गुजारिश की। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक फेसबुक से कंटेंट हटवाने के मामले में भारत टॉप था, इस दौरान सरकार ने 30,000 बार कंटेंट हटाने की मांग की।
हालांकि बाद में यह मांग घटते-घटते 3,500 पर पहुंच गई। रिपोर्ट कहती है कि 2013 में कंटेंट हटवाने की लिस्ट में भारत टॉप पर था, मगर अब सातवें नंबर पर है। ये अबतक का सबसे कम नंबर है।
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मामले में फेसुबक ने कहा, “प्रत्येक आवेदन की हम सावधानीपूर्वक जांच करते हैं कि वे कानूनी रूप से पर्याप्त है या नहीं और उसी आधार पर हम उसे स्वीकार करते हैं या खारिज करते हैं।”

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