गांधी के
बाबू के बारे में तो पूरा विश्व जानता है। लेकिन गोडसे को लोग सिर्फ राष्ट्रपिता के हत्यारे के तौर पर ही पहचानते हैं। इस पहचान के चलते ही शायद लोगों में उसके बारे में जानने की भी रुचि नहीं है। लेकिन गोडसे के बारे में कुछ ऐसी बाते भी हैं जिन्हें शायद आपने न तो पढ़ा होगा न ही सुना होगा।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को हत्या कर दी गई थी। गांधी जी के लिए कुछ फैसलों की वजह से नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी थी। नाथूराम को 15 नवंबर, 1949 को गांधी जी की हत्या के जुर्म में फांसी दी गई थी।
पुणे के नजीदक बसे एक गांव के ब्राह्मण परिवार में 19 मई 1910 को नाथूराम का जन्म हुआ था। हालांकि जन्म के बाद इनका नाम नाथूराम नहीं था। नाथूराम के जन्म से पहले उनके तीन भाई भी थे, लेकिन वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह सके।
इनके माता पिता के एक बेटी भी थी। अन्य बेटों की तरह नाथू को उनके माता पिता खोना नहीं चाहते थे। इस वजह से उन्होंने इनकी परवरिश बेटी की तरह ही की। यह बातें एक किताब में बताई गई हैं।
मशहूर लेखक मनोहर मालगांवकर की लिखी किताब ‘द मैन हू किल्ड गांधी’ के मुताबिक, नाथूराम के पिता विनायक की जल्द शादी हो गई थी। विवाह के बाद उनके घर लड़के का जन्म हुआ और कुछ समय बाद लड़की हुई। लेकिन दो साल में ही लड़के की मौत हो गई।
इसके बाद घर में दो और लड़कों ने जन्म लिया। यहां भी किस्मत को कुछ और मंजूर था। दोनों बेटों का निधन भी जल्द हो गया।
किताब में बताया गया है कि, तीन बेटों को खोने के बाद नाथूराम के माता पिता के मन में एक धारणा घर कर गई। उन्हें लगा कि उनके घर जन्म लेने वाले बेटों पर किसी का शाप है। इसके बाद किसी ने उनको सुझाव दिया कि जब भी घर में कोई लड़का हो तो उसे लड़कियों की तरह ही रखना।
लड़के के लिए माता पिता ने गई मंदिरों की चौखटें भी चूमीं। इसके कुछ बाद उनके घर एक लड़का हुआ। लड़के का नाम रखा गया राम चंद्र। नाम भले ही लड़कों वाला था, लेकिन उसकी परवरिश पूरी तरह से लड़कियों की तरह होने लगी थी।
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घरवालों ने अपनी धारणा के अनुसार लड़के के नथुने में नथ पहना दी। नाम तो राम चंद्र था लेकिन सब कहते राम ही थे। नथ पहने के बाद लड़के को नाथू राम कहा जाने लगा। जो बाद में यही पड़ गया।

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