24 दिन
साध्वी ने कहा कि गिरफ्तारी की रात से ही एटीएस के पुरुष कर्मचारी उसके साथ मारपीट करते थे। बतौर साध्वी प्रज्ञा 24 दिन तक लगातार दिन रात एटीएस के अधिकारी बेल्ट से पीटते रहे थे। उन्होंने बताया कि वह बेल्ट पहनने वाला नहीं बल्कि
एस्केलेटर का फीता होता था जिसके किनारों पर लकड़ी के हैंडल लगे होते थे। साध्वी ने बताया कि एटीएस के अधिकारी काफी बातें कहवाना चाहते थे जो उन्होंने नहीं कही।
साल 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) द्वारा गिरफ्तार करने और टॉर्चर करने की पीड़ा मीडिया से साझा किया है।
इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में साध्वी प्रज्ञा ने बताया कि गिरफ्तारी के 13 दिनों तक एटीएस के अधिकारियों ने नियम कानून को ताक पर रखते हुए उन्हें कालकोठरी में रखा और कोर्ट के सामने पेश नहीं किया।
साध्वी ने बताया कि जब उनकी पिटाई होती थी तब उनके दोनों हाथ काले और कड़े हो जाते थे। इसके बाद वो गर्म पानी में हाथ डलवाते थे, इससे उन्हें घनी पीड़ा होती थी। बतौर साध्वी अक्सर उनका सिर दीवार पर पटका जाता था। साध्वी ने बताया कि उनकी इतनी पिटाई की जाती थी कि वो हाथ से पानी का गिलास भी नहीं पकड़ पाती थीं।
उन्होंने बताया कि पिटाई के दौरान उनके पैर, हाथ और कमर काले पड़ जाते थे। उन्हें सोने नहीं दिया जाता था ताकि मानसिक तौर पर पंगु बना दिया जाए। उन्होंने बताया कि चारों ओर से घेरा बनाकर लोग एकसाथ पीटते थे, शरीर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं जहां नहीं पीटा। होटल ले जाकर भी इतना पीटा कि बेहोश हो गई।
साध्वी ने कहा कि पीटते-पीटते जब एटीएस के अधिकारी थक जाते थे तब वो लोग गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर देते थे। प्रज्ञा के मुताबिक थकने पर ये लोग पान खाने या सिगरेट पीने जाते थे। साध्वी के मुताबिक शिफ्ट में अधिकारी आते थे और
दूसरी शिफ्ट के लोग भी आते ही पिटाई शुरू कर देते थे। साध्वी ने कहा, “पूछताछ में वे लोग दबाव बनाते थे कि मैं आरोप स्वीकार कर लूं कि धमाकों में मैं शामिल थी और ऐसा संघ के लोगों के कहने पर किया था।”
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साध्वी ने कहा कि नियम के अनुसार 24 घंटे के अंदर बंदी प्रत्यक्षीकरण होता है और 48 घंटे में मेडिकल कराना होता है लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। बता दें कि हाल ही में एनआईए ने अपनी जांच में साध्वी को क्लीन चिट दी है।

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