बनारस में
वाराणसी के दशाश्वमेध थाना अंतर्गत मुंशी घाट के एक घर में रविवार दोपहर बाद भयानक मंजर देखने को मिला।
दुर्गंध से परेशान पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस घर में घुसी तो तरुण कांति (63) के शव पर चादर डाल कर पत्नी सुचित्रा और साली सुनंदा बैठी मिलीं।

पास ही तीन बंदर भी मृत पड़े थे। दुर्गंध से पुलिस वाले उल्टी करने लगे, लेकिन दोनों बहनें सहज भाव से बैठी थीं। पुलिस ने किसी तरह से शव उठवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

आशंका जताई गई है कि तरुण कांति की मौत आठ से दस दिन पूर्व हुई होगी। मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और दोनों बहनों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं बताई गई है और वे पुलिस को कोई जानकारी नहीं दे सकीं।

मुंशी घाट के लोग तरुण कांति के घर से आने वाली दुर्गंध से परेशान थे। दो दिन पहले शिकायत पर पुलिस आई तो सुचित्रा और सुनंदा ने बताया कि बंदर मर गए हैं।

पुलिस बंदरों को हटवाने की हिदायत देकर लौट गई थी। रविवार को फिर मोहल्ले के लोगों ने मामले की शिकायत पार्षद नरसिंह दास के साथ ही पुलिस से की।

पुलिस आई और घर में घुसकर मरे पड़े बंदरों को हटवाया, लेकिन दुर्गंध का आना खत्म नहीं हुआ। पुलिस फिर घर में घुसी तो अंदर का नजारा देख सभी बाहर भाग आए और उल्टी करने लगे।

मुंह पर रुमाल बांध कर पुलिस अंदर घुसी तो देखा कि तरुण का शव चादर से ढका है और उनकी पत्नी सुचित्रा व उसकी बड़ी बहन सुनंदा बिना किसी परेशानी के बैठी हुई थी।
थानाध्यक्ष दशाश्वमेध ने बताया कि दोनों बहनें कुछ कहने या बता पाने की स्थिति में नहीं है। पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट होने पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तरुण कांति के घर की घटना से मुंशी घाट के लोगों को मई माह में हुए कबीर नगर की घटना याद आ गई। भेलूपुर थाना अंतर्गत दुर्गाकुंड क्षेत्र की कबीर नगर कॉलोनी में 23 मई 2018 को दुर्गंध से परेशान पड़ोसियों की शिकायत पर पहुंची पुलिस ने पाया कि
70 वर्षीय अमरावती का शव उनके बच्चों ने पांच महीने से घर पर विशिष्ट किस्म के केमिकल लगाकर रखा हुआ था। इसके पीछे की वजह महिला की पेंशन बताई गई थी।
अमरावती देवी के शव के साथ उनके बेटे और बेटियां सहज भाव से घर पर ही रहते थे और किसी को आने नहीं देते थे।
ससुराल में रहते थे तरुण, पड़ोसियों से नहीं था मेलजोल
तरुण कांति मुंशी घाट में अपनी ससुराल में रहते थे। कोयला व्यापारी काली बाबू के नाम से पहचाने जाने वाले तरुण के ससुर, सास और एक साली की अरसे पहले मौत हो चुकी है। तरण, पत्नी सुचित्रा और उसकी बड़ी बहन सुनंदा के साथ रहते थे।
वो नि:संतान थे। दस साल पहले स्कूल से सुनंदा अविवाहित थी। मोहल्ले के लोगों के अनुसार तरुण, सुचित्रा व सुनंदा की पड़ोसियों से बातचीत नहीं होती थी।

तीनों घर से बाहर बहुत कम निकलते थे। तरुण के घर पड़ोेसियों ने कभी किसी को आते-जाते भी नहीं देखा। पूर्व पार्षद चंद्रनाथ मुखर्जी ने बताया कि परिवार मिलनसार नहीं था और

मोहल्ले के लोगों से बातचीत नहीं थी। दोनों बहनों की मानसिक स्थिति कब खराब हुई, इसकी भी जानकारी किसी को नहीं है।

पड़ोसी सपन बनर्जी ने कहा कि रिटायर होने के बाद से सुनंदा की मानसिक स्थिति सही नहीं प्रतीत होती थी। गोली चटर्जी ने कहा कि तरुण और उनके ससुराल वाले पुराने रईस थे। तरुण का किसी से मतलब नहीं था। पहले यहां लोगों का जमावड़ा लगता था।

मकान हड़पे जाने के डर से सहमा रहता था परिवार
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि तरुण और उनका परिवार अनजाने भय से ग्रसित था। उन्हें लगता था कि उनके मकान पर कोई कब्जा कर लेगा।
इसकी शिकायत दो साल पहले तरुण ने एक विधायक के माध्यम से तत्कालीन एसएसपी से की थी। शरीर पर सफेद दाग होने के कारण भी तरुण लोगों से मेलजोल से कतराते थे।

वहीं, सुनंदा को आखिरी बार काली पूजा में देखा गया था। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, तब सुनंदा ने प्रसाद ग्रहण किया था और चुपचाप लौट गई थी। मोहल्ले के लोगों ने सुनंदा से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया था।

परिवार के तीनों सदस्य खाना बनाने की बजाय ब्रेड आदि पर निर्भर रहते थे। वहीं, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद पुलिस ने दोनों बहनों की सुध नहीं ली। उन्हें न तो अस्पताल भिजवाया और न ही किसी स्वयंसेवी संगठन से उनकी मदद के लिए संपर्क किया।

तरुण के घर में घुसी पुलिस को दर्जन भर कुत्ते, बंदर, बिल्लियां और बड़े-बड़े चूहे मिले। जगह-जगह गंदगी फैली हुई थी।
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दुर्गंध के कारण किसी के लिए वहां खड़े हो पाना भी संभव नहीं हो पा रहा था।

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