हर्ष फायरिंग
हाईकोर्ट ने यह बात एक पिता की ओर से दायर मुआवजा याचिका पर सुनवाई के दौरान कहीं। याची की नाबालिग बेटी की अप्रैल 2016 में घुड़चढ़ी के दौरान हर्ष फायरिंग में गोली लगने से मौत हो गई थी।
शादी व अन्य उत्सवों में होने वाली हर्ष फायरिंग के दौरान कोई हादसा होता है तो इसके लिए शादी अथवा उत्सव के आयोजकों को भी जिम्मेदार माना जाएगा।
जस्टिस विभू बाखरू ने कहा कि कार्यक्रम व उत्सव आयोजक को तय करना होगा कि उसके मेहमान हर्ष फायरिंग नहीं करेंगे। अगर हर्ष फायरिंग की जाती है तो वह इसकी जानकारी पुलिस को देंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ न कुछ किया जाना चाहिए।

अगर सरकार कोई दिशा-निर्देश नहीं बनाती है तब तक आयोजक को ही इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा। आप यह नहीं कह सकते कि हर्ष फायरिंग की आपको जानकारी नहीं थी या अपने रिश्तेदारों को हथियार लाने के लिए नहीं कहा था।

दिल्ली सरकार और पुलिस से भी मुआवजे की मांग

याची ने अपनी नाबालिग बेटी की मौत के लिए दूल्हे व उसके परिजनों को दोषी ठहराते हुए 50 लाख तो दूसरी ओर केंद्र व दिल्ली सरकार तथा दिल्ली पुलिस से भी संयुक्त रूप से 50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की थी।

आरोपी पक्ष ने दिया तर्क

दूसरी ओर, दूल्हे व उसके परिजनों का तर्क था कि बारात में किसी भी हर्ष फायरिंग की उन्हें जानकारी नहीं थी। बारात में हथियार के इस्तेमाल पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जिस बारात में हर्ष फायरिंग हुई थी उसका आयोजन दूल्हे व उसके परिजनों ने किया था। यह दोनों तथ्य दूल्हे व उसके परिजनों को जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त हैं।

केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व दिल्ली पुलिस से हाईकोर्ट ने पूछा है कि ऐसे मामलों में मुआवजा देने की जिम्मेदारी किसकी बनती है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 16 जनवरी 2019 की तारीख मुकर्रर की गई है।

याची श्याम सुंदर कौशल का कहना है कि उसकी बेटी दूसरी मंजिल की बॉलकनी से 16 अप्रैल 2016 को बरात देख रही थी।

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उसी दौरान किसी बराती ने हवा में गोली चलाई जो उसकी बेटी को लग गई।

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