देवरिया जनपद मे एक ऐसी भी पुलिस चौकी है जो जिला अधिकारी आवास से कोतवाली जाने वाली रोड पर रजिस्ट्री आफिस के बगल मे स्थित है।
जिसे गरुणपार चौकी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि
पुलिसकर्मी अपने घरों से दूर रहकर आम जनता की सुरक्षा हेतु अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं
और अपने घर परिवार से दूर रहकर जनता की सुरक्षा में रात हो या दिन हो शान्ती व्यवस्था बनाने हेतु लगे रहते हैं लेकिन
कभी इन छोटे पुलिस कर्मचारियो पर उनके अधिकारीयो की नजर नही पङती है कि येे कैसे अपनी डयूट्री निभाते है? और रहते है
वो तो बस किसी मीटिंग,निमन्त्रण या दौड़े मे ही रह जाते है।
बता दें कि पूर्व कप्तान प्रभाकर चौधरी के समय मे इसी चौकी के एक पुलिस कर्मचारी पर
चौकी की जर्जर छत का कुछ हिस्सा टूट कर गिर गया था।
जिससे पुलिस का सिपाही हरिओम गंम्भीर रुप से घायल हो गया और सप्ताह भर जिला अस्पताल मे पड़ा रहा।
जब इस घटना कि जानकारी पूर्व कप्तान प्रभाकर चौधरी को हुई तो चौकी की हालत को संंज्ञान मे लिया और
उसको तोङ नया भवन निर्माण कराने को कहा लेकिन
कुछ दिनों बाद उनका स्थानान्तरण हो गया और उनके चले जाने के बाद
उस गरुणपार चौकी की हालत को किसी ने नही जानना चाहा चौकी की हालत यह है कि
पूर्ण रूप से जर्जर हो चूकी है जो किसी भी वक्त गिर सकता है लेकिन
पुलिस के उच्च अधिकारी या हमारे पुलिस अधिक्षक साहब सैकडों बार उधर से आये गये होगे लेकिन
एक बार भी उस तरफ ध्यान नही गया होगा। आज हमारे चौकी के सिपाही अपने फर्ज को निभाने के लिए व लोगो मे शांन्ती सुरक्षा को कायम रखने के लिए
अपने परिवार बाल बच्चो से दूर रहकर उन्होंने वर्दी कि गरिमा को बचाये रखा है।

हम बताना चाहेगे कि जर्जर चौकी पर आये दिन जनता की
सुरक्षा मे तत्पर रहने वाले कर्मचारी रोज वहा डयूट्री के बाद आराम करते रहते है अगर
इनके साथ पूर्व कि तरह कोई हादसा हो जायेगा तो
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कौन जिम्मेदार होगा जहा पुलिस कर्मी अपने जान को जोखिम मे डाल कर सो रहे है।

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