प्रदेश सरकार
लखनऊ/प्रयागराज,। कुंभ में स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए प्रदेश सरकार कई स्तर पर निगरानी करने जा रही है।
गंगा व सहायक नदियों की जल गुणवत्ता की जांच के साथ ही विभिन्न स्थानों पर पानी के नियमित नमूने लिए जाएंगे।
जहां भी गड़बड़ी मिलेगी वहां तत्काल उपाय किए जाएंगे। सप्ताह में 1300 से अधिक जल के नमूने लेने की योजना है। 15 मार्च तक कुल 26 हजार से अधिक नमूने लिए जाएंगे।
गंगा जल की निगरानी के लिए 131 जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ), लैब असिस्टेंट और फील्ड अटेंडेंट रखे जाएंगे।
श्रद्धालुओं को स्नान के लिए साफ पानी मिले इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई है। इसी के तहत बोर्ड ने विस्तृत प्लान तैयार किया है।
बोर्ड न सिर्फ कुंभ के दौरान जगह-जगह नमूने एकत्र करेगा बल्कि वहां की जल की गुणवत्ता भी सुनिश्चित कराएगा। गंगा व सहायक नदियों में प्रति सप्ताह करीब 200 नमूने लिए जाएंगे।
प्रयागराज में गंगा और यमुना में मिलने वाले नालों की निगरानी के लिए प्रति सप्ताह 227 नमूने लिए जाएंगे।  रामगंगा में मिलने वाले नालों की निगरानी के लिए भी प्रति सप्ताह 26 नमूने लिए जाएंगे।
काली पूर्वी नदी में मिलने वाले नालों की निगरानी के लिए प्रति सप्ताह 19 नमूने लिए जाएंगे। वरुणा में मिलने वाले नालों के प्रति सप्ताह 14 नमूने लिए जाएंगे।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लान व कंबाइंड एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के भी प्रति सप्ताह 96 नमूने एकत्र किए जाएंगे। वहीं, गंगा क्षेत्र में स्थित 733 उद्योगों की निगरानी के लिए प्रति सप्ताह सभी जगह से नमूने लिए जाएंगे। 
प्रदेश सरकार उद्योगों व एसटीपी की थर्ड पार्टी जांच करवाएगी। यह निगरानी नेशनल मिशन फॉर ग्रीन गंगा के सहयोग से कराया जाएगा।
थर्ड पार्टी निगरानी इसलिए कराई जा रही है ताकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर पक्षपात के आरोप न लग सके। 
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक कंट्रोल रूम भी स्थापित करेगा। यह कंट्रोल रूम 24 घंटे सातों दिन काम करेगा।
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कंट्रोल रूम 15 नवंबर से 15 मार्च तक चलेगा। बोर्ड की वेबसाइट में कुंभ मेला से संबंधित सूचनाएं प्रदर्शित करने के लिए एक अलग वेब पेज बनाया जाएगा।

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