वाराणसी के
वाराणसी,। लोहता क्षेत्र में पिछले वर्ष भी डायरिया जैसी बीमारी ने कई घरों को अपने चपेट में ले लिया था और दो लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने इस इलाके की सुध ली थी।

 

मौके का मुआयना करने जिलाधिकारी भी गए थे। कुछ वैसी ही स्थिति इस बार भी होने के कगार पर है। लोहता क्षेत्र का कोटवा इलाका बीमारियों की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाता है।
लोहता क्षेत्र के कोटवा इलाके में अन्य इलाकों की अपेक्षा बीमारियां तेजी से पैर पसारती हैं। इसका कारण यहां गंदगी है और साफ सफाई भी नहीं होती।
मच्छरों की संख्या काफी है ऐसे में फागिंग न होने से भी स्थिति विकट होती जा रही है। यहां के अधिकाश घरो में डेंगू व चिकनगुनिया जैसी बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है।
कोटवा का डिहवा मुहल्ला अत्यधिक घना होने के चलते धूप जमीन तक नहीं पहुंच पाती है जिसकी वजह से प्रत्येक वर्ष कोई न कोई बीमारी महामारी का रूप धारण कर लेती है।
वर्तमान समय मे कोटवा और डिहवा में लगभग तीन दर्जन से भी अधिक लोग दोनों बीमारियों से प्रभावित हो चुके हैं।
इन बीमारियों से जूझ रही तबस्सुम17, आरिफ 25, मोबशेरा बानो 26, मोकदश बानो 19, समा परवीन 18, महताब 15, रूबी 14, नजमा 10, जीनत 22, नसीम 25 जैसे करीब
तीन दर्जन से भी अधिक है लोग हैं जिनका कहना है क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा न होने से नागरिक परेशान हैं। इसके कारण बीमारियां फैल रही हैं।
काशी विद्यापीठ ब्लॉक के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नवीन सिंह ने बताया कि पूरे इलाके में एक बार फागिंग कराई गई है। कुछ घरों में एंटी लार्वा का भी छिड़काव किया गया है।
घरों में पायरेक्शन आदि दवाओं का भी छिड़काव किया जा रहा है चूंकि क्षेत्र काफी सघन होने के चलते प्रत्येक घर में छिड़काव संभव नहीं हो पाता,
फिर भी हमारी टीम लगी हुई है। लगभग 70 से 80 प्रतिशत निगरानी इस क्षेत्र की हो रही है।
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सबसे बड़ी बात है कि इलाके में जागरूकता की कमी होने से बीमारी पर रोकथाम संभव नहीं हो पा रहा है।

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