उत्साह
सप्ताहभर से चल रही चहल-पहल आज चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई। सुबह से ही तैयारी शुरू हो गई। महिलाओं ने घर की रसोई सँभाली, तो पुरुषों ने बा़जार का दायित्व।

 

पर, सभी को इन्त़जार शाम का था। धुँधलका छँटते ही उत्सव का उत्साह शिखर पर पहुँच गया। दीयों की रोशनी से पूरा महानगर ऐसा नहाया, मानों अमावस की रात को पूर्णिमा का चाँद निकल आया हो। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान सतरंगी हो गया।
दीपावली के पाँच दिनी उत्सव की शुरूआत भले ही धनतेरस से हो जाती है, लेकिन असली रोमांच दीपोत्सव का ही होता है,
जिसकी तैयारियाँ कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। और असली रौनक आखिरी 2 दिन में ही ऩजर आती है, जब ग्राहकों का रेला बा़जार का रुख करता है।
धनतेरस और छोटी दीपावली पर लोगों ने बा़जार पर खूब धन वर्षा की, जिसका क्रम आज और ते़ज हो गया। सुबह शटर उठते ही बा़जार ग्राहकों की भीड़ से भर गए।
उधर, महिलाओं ने रसोईघर में डेरा जमा लिया और दिन भर पकवान बनते रहे। घर के दरवा़जे पर रंगोली सजाई गई, तो बन्धनवार बाँधकर दीपावली शुभ होने का सन्देश दिया गया।
बुजुर्गो व भगवान के आशीर्वाद से दिन की शुरूआत कर लोगों ने पूजन की तैयारी शुरू कर दी। शाम को मुहूर्त पर प्रतिष्ठान व घरों में विधि-विधान से माँ लक्ष्मी व गणेश की पूजा की गई।
दरवा़जे और छत पर मिट्टी के दीपक रखे गए, जिससे महानगर अद्भुत रोशनी से जगमगाने लगा। इसके बाद शुरू हुआ धूम-धड़ाके का सिलसिला, जिसमें बच्चे और बड़े भी शामिल हो गए।
किसी ने ते़ज आवा़ज के पटाखे चलाकर पर्व के उत्साह का शंखनाद किया, तो बच्चों ने सतरंगी रोशनी बिखेरने वाली आतिशबाजी चलाई। देर रात तक आतिशबाजी चलती रही। इससे पहले सुबह से ही बधाइयों का दौर चलने लगा, जो देर रात तक चलता रहा।
दीपावली पर्व पर अधिकांश लोग नए कपड़े व अन्य सामान ख्ररीदते हैं। वैसे तो बर्तन व आभूषण आदि की ख्ररीदारी धनतेरस के दिन ही हो जाती है,
लेकिन बा़जार की रौनक दीपावली तक बनी रहती है। आज बा़जारों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी।
कपड़े से लेकर गिफ्ट आइटम, डि़जाइनर जूते-चप्पल, मिठाई आदि की जमकर बिक्री हुई। घर की सजावट का सामान भी खूब बिका।
दीपावली पर्व पर आतिशबाजी का क्रे़ज सबसे अधिक रहता है, लेकिन इस बार आतिशबाजी बा़जार पर चढ़ी महँगाई ने लोगों की जेब ढीली कर दी।
बच्चों ने रोशनी वाली आतिशबाजी पर जोर दिया, तो युवाओं ने ते़ज धमाका करने वाले पटाखे ख्ररीदे। अनार, चकरी व आसमान रंगीन करने वाली आतिशबाजी की भी खूब बिक्री हुई।
दीपावली पर मुँह मीठा कराने की परम्परा पुरानी है, लेकिन इस बार लोगों ने ड्राइ फ्रूट व डिब्बाबन्द मिठाई को अधिक पसन्द किया।
इसका असर छोटी दुकानों पर पड़ा। उन्होंने काफी पैसा खर्च कर मिठाइयाँ बनवाई, लेकिन बिक्री अपेक्षाकृत काफी कम रही,
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जबकि ब्रैण्डिड डिब्बाबन्द मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की कतार लगी रही। चॉकलेट की बिक्री भी काफी अच्छी रही।

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