पटाखे
भिवानी में एक बंदर छत पर से कूदने लगा तो लोहे का एक सरिया उसके बदन के आर-पार हो गया। बंदर के गिरने का कारण पटाखों की अावाज से डरना माना जा रहा है।

 

सरिये में बंदर का शरीर बुरी तरह से फंस गया और बंदर दर्द के मारे छटपटाने लगा। प्रयास करने के बावजूद बंदर सरिए में ही फंसा रहा।
ये सब देख और भी बंदर मौके पर पहुंचे और सांकेतिक भाषा में संदेश देते हुए विचलित नजर आए।
सूचना पाकर मौके पर गौ रक्षा दल के गौसेवक मनीष अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। मगर आसपास काफी संख्या में मौजूद बंदरों ने घायल बंदर के नजदीक नहीं जाने दिया।
इसके बाद काफी प्रयत्‍न किया गया तो बंदरों को भगाने में कामयाब हो पाए। इसके बाद गौ सेवा दल के सदस्‍यों में बड़ी मशक्‍कत से बंदर को बाहर निकाल लिया।
बंदर को खुली जगह में लाकर सबसे पहले उसे दर्द निवारक इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद टिटेनस का इंजेक्शन देकर घायल बंदर के जख्‍म पर महरम पट्टी की गई। ऐसे में बंदर की जान को बचा लिया गया।
गौ सेवा दल के टीम लीडर मनीष ने कहा कि उन्‍हें किसी भी जानवर के घायल होने की सूचना मिलते ही वो मौके पर पहुंचते हैं। वो अब तक कई गायों की जान बचा चुके हैं।
इसी तरह अन्‍य जानवर की जान की भी इसी तरह से इफाजत करते हैं। सूचना साझा की जा सके इसके लिए एक वाट्स एप ग्रुप भी बना रखा है।
मनीष और टीम के साथियों ने कहा कि आज दिवाली है और सब लोग दिवाली का आनंद लेने में मशगूल हैं। मगर हमें जैसे ही बंदर के घायल होने की सूचना मिली हम वैसे ही मदद के लिए निकल पड़े।
उन्‍होंने कहा एक जीव की जान बच गई इससे बड़ी खुशी और क्‍या हो सकती है। अब मनी है असली दिवाली।
मनीष ने कहा कि दिवाली पर लोग आतिशबाजी करके खुश हाेते हैं मगर पटाखों की आवाज सुन पशु पक्षी विचलित हो जाते हैं।
ऐसे में लोगों ये समझना चाहिए कि वो आतिश बाजी करके पर्यावरण और जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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ये बंदर भी शायद किसी तरह की आवाज सुनकर हड़बड़ाहट में गिरा होगा।

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