बहन-बेटी
विभिन्न मुद्दों पर संतों के ‘धर्मादेश’ को पढ़ते हुए समिति के प्रमुख हंसदेवाचार्य ने कहा, ‘अगर जीवित रहना है, मठ-मंदिर बचाना है, बहन-बेटी बचानी है, संस्कृति और संस्कार बचाना है तो इस सरकार को दोबारा से लाना है।’
संतों को इस सरकार पर भरोसा है कि वही उस इच्छा को पूरी कर सकती है, जो कोई दूसरी सरकार नहीं कर सकती। संतों के मुताबिक, ‘सिर्फ यही सरकार हमारी उम्मीदें पूरी कर सकती है।
अपना देश भी बचाओ, अपनी संस्कृति भी बचाओ और फिर से इस भारत के अंदर इसी सरकार को 2019 में वापस लाओ, लाओ… जय श्री राम।’
हंसदेवाचार्य ने कहा कि राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ होने में देरी होने की वजह से संत आहत हैं। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हम केंद्र सरकार के देश, धर्म, संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े कामों से संतुष्ट हैं।’
अखिल भारत संत समिति ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के लिए ऑर्डिनेंस या कानून का सहारा लेना चाहिए।
इसके साथ ही साधुओं ने अपने अनुयायियों से अपील किया कि वे सुनिश्चित करें कि नरेंद्र मोदी 2019 में सत्ता में वापसी करें।
उन्होंने कहा कि लोगों को उनको वोट करना चाहिए, जिनकी ‘गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गोविंद’ में आस्था हो। संत समिति ने अयोध्या, नागपुर और बेंगलुरु में 25 नवंबर को तीन और ‘धर्मसभाएं’ आयोजित किए जाने का ऐलान किया है।
इसके अलावा, 9 दिसंबर को दिल्ली में भी बड़ी तादाद में साधु इकट्ठे होंगे। उनके मुताबिक, 18 दिसंबर के बाद से पूरे देश में ऐसी 500 से ज्यादा बैठकें होंगी।
पुणे के संत गोविंद गिरी ने कहा कि कुछ ताकतें सरकार को ‘अस्थिर’ करने की कोशिश कर रही है और मध्य प्रदेश में सरकार के खिलाफ एक ‘साजिश’ रची गई। उन्होंने कहा, ‘भविष्य की योजना बनाते वक्त हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि
किसी भी हालत में हमारी केंद्र सरकार अस्थिर नहीं होनी चाहिए।’ उनके मुताबिक, संत चाहते हैं कि बीजेपी सत्ता में दोबारा से आए। बता दें कि संतों ने तीर्थयात्राओं को बढ़ावा देने के लिए ‘तीर्थाटन मंत्रालय’ बनाए जाने की मांग की।
साधुओं ने कहा कि यह भी सुनिश्चित हो कि तीर्थाटन वाले स्थान टूरिस्ट प्लेस में न तब्दील हों। गायों की हिफाजत के लिए ‘गौ मंत्रालय’ के निर्माण की भी मांग की गई।
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