साधु-संत
नई दिल्ली,। शनिवार को तालकटोरा स्टेडियम में शुरू हुए तीन हजार साधु-संतों के सम्मेलन में रविवार को धर्मादेश जारी किया जाएगा।
इसके साथ ही साधु-संतों ने प्रस्ताव जारी कर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार को साधुवाद दिया।
अखिल भारतीय संत समिति के बैनर तले जमा हुए साधु-संतों के सम्मेलन के पहले ही 1984 के दंगे में मारे सिखों, अयोध्या गोली कांड में मारे गए रामभक्तों, 1967 में
गोरक्षा आंदोलन में मारे गए संतों के साथ-साथ सीमा पर शहीद होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। संतों के भाषण में राम-मंदिर निर्माण का मुद्दा भी बीच-बीच में उठा।
रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने दिसंबर में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के अपने पुराने दावे को फिर दोहराया और कहा कि लखनऊ में मस्जिद का निर्माण होगा।
मस्जिद के निर्माण की वेदांती की बात पर कुछ संतों ने आपत्ति जताई। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष जगदगुरू रामानंदचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि
हमारा काम मस्जिद बनाने का नहीं है, लेकिन विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने साफ किया कि वेदांती के प्रस्ताव में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
सम्मेलन में साधु-संतों के बीच राम मंदिर पर सुनवाई की तारीख जनवरी में तय करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाराजगी साफ देखी जा सकती थी।
साधु संतों का कहना था कि इसके लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता है और सरकार को अध्यादेश लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करना चाहिए।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर रविवार को विस्तार से विचार किया जाएगा।
इसके बाद मंदिर निर्माण के लिए साधु-संत एकमत से धर्मादेश जारी करेंगे। धर्मादेश में सरकार को राममंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने या फिर शीतकालीन सत्र में संसद में बिल पास कराने को कहा जाएगा। 
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साथ ही धर्मादेश नहीं माने की स्थिति में साधु-संत देश-व्यापी आंदोलन और जनजागरण अभियान की रूपरेखा भी जारी कर सकते हैं।

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