राम मंदिर
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व जज चेलामेश्वर ने कहा कि पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहां विधायी प्रक्रिया से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को विफल कर दिया गया था। ऐसे में केन्द्र सरकार राम मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बावजूद, कानून ला सकती है।
जस्टिस चेलामेश्वर का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में राम मंदिर मुद्दे पर होने वाली सुनवाई को जनवरी तक के लिए टाल दिया गया है। इसके बाद भाजपा और आरएसएस में ऐसी मांग उठने लगी है कि
सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस चेलामेश्वर का कहना है कि केन्द्र सरकार, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून ला सकती है।
कांग्रेस पार्टी से जुड़े संगठन ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें जस्टिस (रिटायर्ड) चेलामेश्वर ने ये बातें कहीं। जस्टिस चेलामेश्वर ने अपनी बात के समर्थन में उदाहरण देते हुए बताया कि
कर्नाटक विधानसभा ने एक कानून पास कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कावेरी जल विवाद पर दिया गया फैसला विफल कर दिया था। इसी तरह राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बीच जारी अन्तरराज्य जल विवाद में भी ऐसा ही देखने को मिला था।
जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि देश पहले ही इस तरह की चीजें देख चुका है, ऐसे में राम मंदिर के मुद्दे पर भी यह संभव हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि आरएसएस ने शुक्रवार को अपने एक बयान में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि अयोध्या विवाद उनकी प्राथमिकता में नहीं है, हिंदुओं की भावनाओं की बेइज्जती करने जैसा है।
आरएसएस ने कहा कि यदि जरुरत पड़े तो इस मामले पर अध्यादेश लाया जाना चाहिए। आरएसएस के महासचिव भैय्याजी जोशी ने शुक्रवार को कहा है कि
यदि जरुरत पड़ी तो संगठन 1992 जैसा आंदोलन शुरु करने से भी नहीं हिचकिचाएगा। लेकिन जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो कुछ प्रतिबंध हैं।
बता दें कि जस्टिस चेलामेश्वर उन 4 जजों में शामिल थे, जिन्होंने कुछ समय पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ आवाज उठायी थी और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन पर हमला बोला था।
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