ज्यादातर
पीलीभीत,। रोजाना सड़कों पर जितने वाहन फर्राटा भरते दिखते हैं, उनमें से आधे से अधिक चालक बगैर ड्रॉईविंग लाइसेंस वाले होते हैं।
वाहन चलाने में अभ्यस्त नहीं होने के साथ ही यातायात नियमों के बारे में भी ऐसे लोगों को समुचित जानकारी नहीं रहती।
जिले भर में जितनी ट्रैक्टर ट्रालियां दौड़ती हैं, उनमें तो पचास फीसद से अधिक बगैर ड्राइ¨वग लाइसेंस वाले होते हैं। बढ़ते सड़क हादसों के पीछे यह भी एक प्रमुख कारण है।
इस मामले में अभिभावकों में भी जागरूकता की कमी दिखाई दे रही है। नाबालिग होने के बावजूद अनेक अभिभावक अपने बच्चे को स्कूल जाने आने के लिए स्कूटी या बाइक दिला देते हैं।
प्राइवेट स्कूलों के बाहर बाइक व स्कूटी की लंबी कतारें इसकी गवाह हैं कि किस तरह नाबालिग बेधड़क होकर दुपहिया वाहनों का संचालन कर रहे हैं। परिवहन विभाग 18 साल से कम आयु के लोगों को ड्राइ¨वग लाइसेंस जारी नहीं करता।
अगर आवेदक बालिग है, तब भी कंप्यूटर पर लिए जाने वाले टेस्ट में यातायात नियमों एवं वाहन संचालन से संबंधित सवालों के जवाब देने पड़ते हैं।
इसके बाद भी शुरुआती दौर में लर्निंग लाइसेंस ही जारी किया जाता है। यहां तो रोजाना सैकड़ों ऐसे लोग वाहन दौड़ाते दिख जाएंगे, जिनके पास लर्निंग लाइसेंस भी नहीं होता।
किशोर उम्र के लड़के ई-रिक्शा चलाते दिख जाएंगे। वैसे ज्यादातर ई-रिक्शा वालों के पास ड्राइ¨वग लाइसेंस नहीं होता। जिले के विभिन्न मार्गों पर यात्रियों को ढोने का काम करने वाली मैजिक गाड़ियों का आलम यह है कि
उस्ताद की रजामंदी से हेल्पर वाहन को दौड़ा देते हैं। लंबी दूरी के लिए चलने वाले कई ट्रक चालक भी सिखाने के लिए अपने हेल्पर के हाथ में स्टीयरिंग थमाने में संकोच नहीं करते।
हालांकि वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस के साथ ही चालक को यातायात नियमों की अच्छी तरह जानकारी होना भी आवश्यक है।
यह भी पढ़ें: राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन में एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.